नई दिल्ली: 15 अगस्त के मौके पर स्कूल में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह का एक छात्र का भाषण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. छात्र ने अपने भाषण में देश की तरक्की से लेकर स्कूल में मिलने वाले दो लड्डुओं तक का जिक्र किया, जिसे सुनकर वहां मौजूद शिक्षक और अन्य लोग भी हैरान रह गए.
वायरल वीडियो में छात्र कहता नजर आ रहा है कि आजादी के बाद देश में काफी बदलाव आया है और भारत ने हर क्षेत्र में तरक्की की है. हालांकि, उसके मुताबिक एक चीज ऐसी है जो वर्षों से नहीं बदली और वह है 15 अगस्त पर स्कूल में बच्चों को मिलने वाले दो लड्डू.
छात्र ने अपने अंदाज में लड्डुओं की संख्या की तुलना महंगाई से की. उसने कहा कि अगर लड्डुओं की संख्या भी महंगाई की रफ्तार से हर साल बढ़ती तो आज हर बच्चे को 80 लड्डू मिलते.
देश के अन्दर इतना कुछ बदल गया है लेकिन ये स्कूल वालों का दो लड्डू देने का रिवाज़ अभी तक नहीं बदला।
आज भारत 80वा स्तंत्रता दिवस मना रहा है लेकिन ये अभी भी दो लड्डुओं से काम चला रहे हैं!😄 pic.twitter.com/3IEAFRbRfs— Mukhtar Shaikh (@MukhtarUddin70) August 16, 2026Also Read
इसके बाद छात्र ने स्कूल की फीस और सिलेबस में होने वाले बदलावों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह स्कूल फीस और सिलेबस में बदलाव करते हैं, उस हिसाब से बच्चों को कम से कम काजू कतली का डिब्बा मिलना चाहिए.
भाषण के दौरान छात्र ने स्कूल प्रशासन से इस पुराने सिस्टम को बदलने की अपील करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो यहां बैठे लड्डू प्रेमी जंतर-मंतर पहुंचेंगे और इस बार आंदोलन पढ़ाई के लिए नहीं बल्कि मिठाई के लिए होगा.
छात्र के इस अंदाज ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में मौजूद लोगों को खूब गुदगुदाया. वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भी छात्र के भाषण पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.
वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने छात्र के बेबाक अंदाज की तारीफ की. कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि आज की Gen Alpha पीढ़ी अपनी बात खुलकर रखने से पीछे नहीं हटती. कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि कई जगह बच्चों को दो लड्डू भी नहीं मिलते, ऐसे में छात्र की मांग अपने आप में दिलचस्प है.
कुछ लोगों ने छात्र की बात को स्कूल फीस और सुविधाओं से जोड़कर देखा, जबकि अन्य यूजर्स ने उसके भाषण को स्वतंत्रता दिवस समारोह का मजेदार हिस्सा बताया. वीडियो में छात्र की उम्र या स्कूल की आधिकारिक पहचान स्पष्ट नहीं है, इसलिए वायरल दावों को इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए.