पुणे पोर्श केस में जमानत के बाद नाबालिग के पिता ने परिवार के साथ मनाया जश्न, वायरल वीडियो देख भड़के लोग
पुणे पोर्श केस में आरोपी नाबालिग के पिता विशाल अग्रवाल का जमानत मिलने के बाद जश्न मनाते हुए कथित वीडियो वायरल हुआ है. जिसे लेकर सोशल मीडिया पर लोगों में नाराजगी है.
नई दिल्ली: एक स्थानीय रेस्टोरेंट जैसा दिखने वाली जगह पर 1977 का बॉलीवुड गाना 'बंबई से आया मेरा दोस्त, दोस्त को सलाम करो' गूंज रहा है, जहां अग्रवाल परिवार पुणे पोर्श केस में सुप्रीम कोर्ट के जमानत के आदेश का जश्न मना रहा है. विशाल अग्रवाल उस नाबालिग के पिता जिस पर मई 2024 में पुणे में शराब के नशे में पोर्श कार चलाने का आरोप है.
जिससे दो इंजीनियरों की मौत हो गई थी. उसको 10 मार्च को जमानत मिल गई. एक वीडियो जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह जमानत के आदेश के कुछ दिनों बाद का है, उसमें विशाल अग्रवाल को दोस्तों और परिवार के साथ जश्न मनाते हुए दिखाया गया है.
वायरल वीडियो में क्या दे रहा दिखाई?
अब वायरल हो रहे एक वीडियो में अग्रवाल अपनी पत्नी और बेटे के साथ नाचते हुए दिखाई दे रहे हैं. उनके गले में दो मालाएं हैं. एक गुलाबी फूलों की और दूसरी नोटों से बनी हुई. जब बैंड लाइव परफॉर्म कर रहा होता है, तो उनका बेटा उन्हें ऊपर उठा लेता है और परिवार इस जीत का जश्न मनाता है.
उनकी पत्नी भी अपने गले में नोटों की माला पहने नाचती हुई दिखाई देती हैं. वीडियो में बाद में अग्रवाल को एक और आदमी ऊपर उठाते हुए दिखाई देता है, जबकि उनका बेटा उनकी पत्नी को ऊपर उठाता है. वे सब मिलकर नाचते हैं, हंसते हैं और जश्न मनाते हैं. इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों में गुस्सा भड़का दिया है.
नाबालिग के माता-पिता को क्यों गिरफ्तार किया गया था?
अग्रवाल और उनकी पत्नी को कथित तौर पर अपने बेटे के खून के नमूनों में हेरफेर करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, ताकि यह साबित किया जा सके कि घटना के समय वह नशे में नहीं था. कथित तौर पर उसने अपने ड्राइवर पर दुर्घटना की जिम्मेदारी लेने के लिए दबाव डालने की कोशिश की थी. जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने 10 मार्च को अग्रवाल को जमानत दे दी.
पीठ ने आदेश दिया, 'हम यह नोट करते हैं कि अपीलकर्ता पिछले 22 महीनों से जेल में है. अपीलकर्ता ने जमानत के लिए एक मजबूत आधार पेश किया है. जमानत उन शर्तों और नियमों के अधीन दी जाती है जो ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए जाएंगे.' हालांकि शीर्ष अदालत ने अग्रवाल को इस मामले में किसी भी गवाह से संपर्क करने से रोक दिया है.
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