नए साल की रात बाजार में पड़ी अंगूरों की किल्लत, खाली हाथे लौटे 200-300 ग्राहक; Video में दुकानदार ने बताई अजीब वजह

न्यू ईयर 2026 पर भारत में 12 अंगूर खाने का क्रेज देखने को मिला. वायरल वीडियो में दुकानदार ने बताया हरे अंगूरों की भारी किल्लत हो गई थी और 200–300 ग्राहक खाली हाथ लौटे.

Instagram @anam.lmao
Princy Sharma

नई दिल्ली: इस बार न्यू ईयर पर भारत में एक अजीब ट्रेंड चला और यह सब 12 हरे अंगूरों के बारे में था. नए साल की शाम को एक स्पेनिश परंपरा अचानक भारत में वायरल हो गई, जिससे लोकल बाजारों और ऑनलाइन ग्रोसरी ऐप्स में हरे अंगूरों की भारी कमी हो गई. बहुत से लोगों ने देर रात तक बाजारों में खोजा लेकिन खाली हाथ घर लौटे, क्योंकि अंगूर पूरी तरह से दुकानों से गायब हो गए थे.

यह वायरल ट्रेंड एक स्पेनिश रस्म पर आधारित है जिसे Las Doce Uvas de la Suerte कहा जाता है, जिसका मतलब है भाग्य के 12 अंगूर. इस मान्यता के अनुसार, नए साल की शाम को ठीक 12 बजे घड़ी की हर घंटी के साथ एक अंगूर खाने से आने वाले साल के सभी 12 महीनों के लिए सौभाग्य, सफलता और खुशी मिलती है. सोशल मीडिया की ताकत से, यह परंपरा अब भारतीय घरों में, खासकर युवाओं के बीच पहुंच गई है.

दुकानदार ने बताया किस्सा

एक बड़े पैमाने पर शेयर किए गए वायरल वीडियो में, एक दुकानदार यह समझाते हुए देखा जा सकता है कि कैसे अचानक मांग बढ़ गई. उसने दावा किया कि 200 से 300 ग्राहकों को अंगूर खरीदे बिना वापस लौटना पड़ा क्योंकि अंगूर का स्टॉक बचा ही नहीं था. उसने एक दिलचस्प बात भी बताई लोग सिर्फ हरे अंगूर मांग रहे थे. लाल या काले अंगूर साफ तौर पर मना कर दिए गए, क्योंकि कई लोगों का मानना ​​था कि यह रस्म सिर्फ हरे अंगूरों के साथ ही काम करती है.

क्या है मान्यता?

एक और ट्विस्ट ने इस ट्रेंड को और भी वायरल कर दिया. सोशल मीडिया की मान्यताओं के अनुसार, लोगों ने दावा किया कि आधी रात के बाद एक मेज के नीचे बैठकर 12 अंगूर खाने से भाग्य और भी बढ़ जाता है. यह अजीबोगरीब विचार इंस्टाग्राम और रील्स पर तेजी से फैल गया, जिससे रातों-रात मांग आसमान छू गई.

वीडियो पर लोगों ने किया रिएक्ट

इस वीडियो को पहले ही 2.6 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके है और कमेंट सेक्शन ऐसे ही अनुभवों से भरा हुआ है. एक यूजर ने लिखा कि उनके पिता ने आखिरकार अंगूर मिलने से पहले कई बाजारों में खोजा. दूसरे ने कहा कि उनके पास काले अंगूर इस्तेमाल करने के अलावा कोई चारा नहीं था. एक क्रिएटिव यूजर ने तो इसे एक बिजनेस आइडिया में बदलने का सुझाव भी दिया, जिसमें ठीक 12 अंगूर वाले नए साल के अंगूर पैक बेचे जाएं. 

कैसे शुरू हुई यह परंपरा?

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह परंपरा 1909 में मैड्रिड, स्पेन में शुरू हुई थी, जब अंगूर के किसानों ने ज्यादा उपज बेचने के लिए इस रस्म को बढ़ावा दिया था. समय के साथ, यह नए साल का प्रतीक बन गया और अब इसने सीमाएं पार कर ली हैं जिससे भारत में अंगूर का एक अप्रत्याशित संकट पैदा हो गया है. एक बात साफ है सोशल मीडिया रातों-रात अंगूर को भी सोना बना सकता है.