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'लड़की हो? उम्मीद नहीं थी!' इंटरव्यू शुरू होते ही महिला के साथ हो गया ऐसा काम, वायरल पोस्ट पर मचा बवाल

एक महिला ने रेडिट पर नौकरी के इंटरव्यू के दौरान अपने परेशान करने वाले अनुभव के बारे में खुलकर बताया, जहां उसे तुरंत ही लैंगिक भेदभाव वाला अनुभव हुआ. दरअसल, इंटरव्यू लेने वाले ने सबसे पहले उनकी पहचान पर ही सवाल उठा दिया.

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Mayank Tiwari

एक महिला टेक्निकल एक्सपर्ट ने अपने इंटरव्यू में हुए अनुभव को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर चौंकाने वाला खुलासा किया है. उनके खुलासे के बाद  लिंगभेद और वर्कप्लेस पर लोगों के महिलाओं के प्रति व्यवहार को एक बार फिर सामने लाया है. इंटरव्यू के दौरान महिला को उस वक्त झटका लगा जब इंटरव्यू लेने वाले ने सबसे पहले उनकी पहचान पर ही सवाल उठा दिया.

पीड़िता के अनुसार, वह इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डेवलपर की पोस्ट के लिए इंटरव्यू दे रही थी. यह वही पोस्ट है जिसमें उन्होंने स्पेशल ट्रेनिंग ली है और गहरी समझ रखती हैं. लेकिन जैसे ही इंटरव्यू शुरू हुआ, सामने बैठी महिला इन्टर्व्यूअर ने हैरान करने वाली बात कह दी, उन्होंने कहा कि, "ओह, मुझे उम्मीद नहीं थी कि तुम लड़की हो. मुझे लगा था तुम लड़का हो."

इन्टर्व्यूअर ने महिला की योग्यता पर उठाए सवाल 

इसके बाद इंटरव्यू का माहौल और असहज हो गया. इन्टर्व्यूअर ने कहा, "आमतौर पर पुरुष इलेक्ट्रॉनिक्स में ज्यादा जुनूनी होते हैं. वे इसके बारे में चौबीसों घंटे सोचते रहते हैं." इतना ही नहीं, महिला उम्मीदवार के पिछले प्रोजेक्ट्स को भी नजरअंदाज करते हुए उनकी योग्यता पर भी सवाल उठाए गए.

महिला ने रेडिट पर शेयर किया अनुभव 

इन्टर्व्यूअर ने महिला के रूप-रंग पर भी कमेंट्स करते हुए कहा, "इस तरह की फील्ड वर्क वाली नौकरी में सुंदर दिखना फायदेमंद नहीं होता. इसे व्यक्तिगत रूप से न लें." इस पूरी बातचीत ने महिला को बहुत असहज कर दिया और उन्होंने रेडिट पर यह अनुभव शेयर किया है. उनकी पोस्ट पर बड़ी संख्या में कमैंट्स आए हैं, इस दौरान टेक्नीकल फिल्ड में काम करने वाली दूसरी महिलाओं ने भी अपने साथ हुए भेदभाव के अनुभव साझा किए.

यूजर्स ने भी बताए अपने अनुभव

एक यूज़र ने लिखा, "यह पूरी तरह से गैरकानूनी है. आपको यह सब सहना पड़ा, यह बहुत दुखद है." वहीं एक अन्य ने कहा, "मेरी पत्नी एक केमिस्ट थीं और बार-बार जूनियर लोगों को ट्रेन करते-करते थक गई थीं. आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़ दी."यह घटना बताती है कि आज भी कई क्षेत्रों में महिलाओं को उनकी क्षमता के बजाय उनके लिंग के आधार पर परखा जाता है.