सोशल मीडिया पर बेंगलुरु के एक आम लेकिन प्रेरणादायक व्यक्ति की कहानी लोगों का दिल छू रही है. इस कहानी के केंद्र में हैं राजू, जो अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा देने के लिए रोज दोहरी मेहनत करते रहे हैं. सुबह-सुबह डोसा और इडली का बैटर बेचना और उसके बाद पूरे दिन नौकरी करना- राजू ने कभी शिकायत नहीं की, सिर्फ अपने सपने पर डटे रहे.
राजू बेंगलुरु के लालबाग बोटैनिकल गार्डन के पास एक छोटा सा स्टॉल लगाते हैं. उनकी सुबह सुबह 6 बजे शुरू होती है और 10 बजे तक वह ताजा डोसा-इडली बैटर बेचते हैं. इसके बाद वह सीधे अपनी दूसरी नौकरी के लिए निकल जाते हैं, जहां वह दिनभर काम करते हैं. एक सोशल मीडिया यूजर ने बताया कि वह पिछले 15 सालों से राजू से बैटर खरीद रहा है और उनकी मेहनत को करीब से देखता आया है.
राजू की लगातार मेहनत और त्याग का नतीजा आज सबके सामने है. उनकी बेटी ने मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की है और अब एक मल्टीनेशनल बायोटेक कंपनी में नौकरी कर रही है. यह कहानी साबित करती है कि साधारण हालात में भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं.
यह कहानी X पर शेयर होते ही वायरल हो गई. हजारों लोगों ने इसे देखा और राजू को “Quiet Legend” यानी बिना शोर मचाए हीरो बताया. एक यूज़र ने लिखा, “यह मेहनत और माता-पिता के बलिदान की असली मिसाल है.” दूसरे ने कहा, “कोई शिकायत नहीं, बस काम और जिम्मेदारी.”
पोस्ट शेयर करने वाले यूज़र ने लोगों से अपील की कि अगर कोई सुबह लालबाग के आसपास हो, तो राजू से बैटर जरूर खरीदे. उन्होंने साफ कहा कि यह दान नहीं, बल्कि उस व्यक्ति का सम्मान है जिसने मेहनत से अपनी बेटी का भविष्य बनाया.
राजू की कहानी यह सिखाती है कि लगन, ईमानदारी और धैर्य से किया गया काम कभी बेकार नहीं जाता. यह उन सभी माता-पिता के लिए प्रेरणा है, जो अपने बच्चों के सपनों के लिए हर दिन संघर्ष कर रहे हैं.