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'डायन बनीं महिलाओं की प्ररेणा,पद्मश्री से हुईं सम्मानित!', सुनिए छुटनी महतो की दिलचस्‍प कहानी

डायन प्रताड़ना के खिलाफ छुटनी देवी की अगुवाई में चली मुहिम का ही असर है कि झारखंड के चाईबासा, सरायकेला, खरसांवा, खूंटी, चक्रधरपुर के साथ-साथ छत्तीसगढ़, बिहार बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में लोगों के बीच छुटनी देवी अब एक बहुत बड़ा नाम हो गया है.

India Daily Live

 

ये कहानी है एक झारखंड की महिला छुटनी देवी की जिन्हें साल 2021 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया..इस महिला को कभी डायन कह कर घर-गांव से निकाल दिया गया था. 62 साल की छुटनी महतो के नाम के आगे अब भारत का श्रेष्ठ सम्मान पद्मश्री जुड़ गया है. एक समय ऐसा भी था कि घर वालों ने डायन के नाम पर न सिर्फ उसे प्रताड़ित किया, बल्कि घर से बेदखल भी कर दिया था. आठ माह के बच्चे के साथ पेड़ के नीचे रहीं. तब पति ने भी साथ छोड़ दिया था. आज वह अपनी जैसी असंख्य महिलाओं की ताकत बन गई.

डायन प्रथा के खिलाफ आवाज बुलंद करने वालीं पद्मश्री से सम्मानित छुटनी की कहानी करोड़ो महिलाओं के लिए प्रेरणा है. झारखंड की छुटनी देवी को 3 सितंबर 1995 की तारीख अच्छी तरह याद है. इस दिन गांव में बैठी पंचायत ने उन पर जो जुल्म किए थे, उसकी टीस आज भी जब उनके मन में उठती है तो जख्म ताजी हो जाती है. उनकी आंखों में आंसू आज भर जाते है लेकिन वह उदास नहीं बल्की खुश होती हैं, क्योंकि अब छुटनी देनी ने ठान लिया कि ना खुद रोएगी और ना ही बाकी औरतों को रोने देंगी. 

खुद के लिए डायर जैसे शब्दों को सुनना किसी भी महिला को बहुत तकलीफ पहुंचा सकती है. खासकर उसके साथ व्यवहार भी वैसे ही करना मानों जैसे जीते जी मर जाना लेकिन अब डायन प्रताड़ना के खिलाफ छुटनी देवी की अगुवाई में चली मुहिम का ही असर है कि झारखंड के चाईबासा, सरायकेला, खरसांवा, खूंटी, चक्रधरपुर के साथ-साथ छत्तीसगढ़, बिहार बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में लोगों के बीच छुटनी देवी अब एक बहुत बड़ा नाम हो गया है.