चुनाव आयोग समय समय पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण करता है ताकि कोई भी योग्य नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे. इस प्रक्रिया का उद्देश्य नए मतदाताओं के नाम जोड़ना, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना और मतदाता विवरण में हुई गलतियों को सुधारना होता है. उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह प्रक्रिया लोकतंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है.
उत्तर प्रदेश में चल रहे Special Intensive Revision अभियान के दौरान लाखों की संख्या में आवेदन प्राप्त हुए. इसके साथ ही कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने समय सीमा बढ़ाने की मांग की. इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाने का फैसला लिया. पहले यह तिथि 6 फरवरी 2026 तय थी, जिसे अब बढ़ाकर 6 मार्च 2026 कर दिया गया है.
अब वे सभी नागरिक आवेदन कर सकते हैं जिनका नाम अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाया है. नए मतदाता फॉर्म 6 के माध्यम से नाम जोड़ सकते हैं. गलत या डुप्लीकेट नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 भरा जा सकता है. नाम, उम्र, पता या अन्य विवरण में सुधार के लिए फॉर्म 8 का उपयोग किया जाएगा. यह मौका खासतौर पर 18 से 21 वर्ष के युवाओं और महिलाओं के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में यह विशेष पुनरीक्षण अभियान 27 अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ था. 4 नवंबर से 6 जनवरी तक बूथ लेवल ऑफिसर द्वारा घर घर जाकर मतदाता गणना की गई. 6 जनवरी 2026 को मतदाता सूची का ड्राफ्ट प्रकाशित किया गया और इसके बाद दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गईं.
संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब 6 मार्च 2026 तक आवेदन लिए जाएंगे. इसके बाद 27 मार्च तक सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा. अंत में 10 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. यही सूची आगामी चुनावों में मान्य होगी.
चुनाव विभाग के अनुसार नाम हटाने के लिए अब तक 82,684 फॉर्म 7 प्राप्त हुए हैं. नाम जोड़ने के लिए करीब 37.8 लाख फॉर्म 6 जमा किए गए हैं. प्रवासी मतदाताओं के लिए फॉर्म 6A के तहत 1,076 आवेदन मिले हैं. कुल 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने हैं, जिनमें से 2.37 करोड़ नोटिस जारी किए जा चुके हैं. 86.27 लाख नोटिस मतदाताओं तक पहुंच चुके हैं और लगभग 30 लाख मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है.