रसोई में मौजूद कई उपकरणों के बीच फ्रिज ऐसा साधन है जो दिन रात बिना रुके काम करता है. दूध, सब्जियां, बचा खाना और दवाइयां तक इसी में सुरक्षित रखी जाती हैं. चूंकि यह चौबीस घंटे चालू रहता है, इसलिए इसकी छोटी सी गलती भी सीधे बिजली बिल पर असर डालती है. सही जानकारी न होने पर लोग अनजाने में ऐसी सेटिंग कर देते हैं, जिससे खर्च बढ़ता जाता है.
अक्सर घरों में फ्रिज का नॉब हाई या मैक्स मोड पर सेट रहता है, खासकर गर्मियों में. लोगों को लगता है कि ज्यादा ठंडक का मतलब ज्यादा सुरक्षा है. जबकि सामान्य उपयोग के लिए फ्रिज सेक्शन का तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस के बीच पर्याप्त होता है. फ्रीजर को भी जरूरत से ज्यादा माइनस में रखने की आवश्यकता नहीं होती. सही तापमान संतुलन बनाए रखने से अनावश्यक बिजली खर्च से बचा जा सकता है.
जब तापमान जरूरत से ज्यादा कम कर दिया जाता है, तो कंप्रेसर बार बार ऑन होता है और लंबे समय तक चलता है. इससे पावर कंजंप्शन बढ़ता है. चाहे फ्रिज किसी भी ब्रांड का हो, गलत सेटिंग हर मॉडल में बिजली की खपत बढ़ा सकती है. संतुलित तापमान रखने से मशीन पर अतिरिक्त लोड नहीं पड़ता और उसकी कार्यक्षमता भी बनी रहती है.
कई बार लोग फ्रिज का दरवाजा बार बार खोलते हैं या उसे कुछ देर तक खुला छोड़ देते हैं. इससे अंदर का तापमान अचानक बढ़ जाता है. ऐसे में कूलिंग सिस्टम को फिर से ठंडक बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. गर्म खाना सीधे फ्रिज में रखने से भी यही समस्या होती है. पहले खाने को सामान्य तापमान पर ठंडा होने देना बेहतर रहता है.
फ्रिज को पूरी तरह दीवार से सटाकर रखने पर पीछे की कॉइल्स को पर्याप्त हवा नहीं मिलती. इससे हीट बाहर नहीं निकल पाती और मशीन ज्यादा गर्म होती है. बेहतर है कि फ्रिज को दीवार से कुछ इंच की दूरी पर रखा जाए. इससे एयर सर्कुलेशन ठीक रहता है और बिजली की खपत नियंत्रित रहती है.
समय समय पर डीफ्रॉस्ट करना और रबर गैसकेट की जांच करना जरूरी है. यदि दरवाजे की सील ढीली है तो ठंडी हवा बाहर निकलती रहती है और कंप्रेसर लगातार चलता रहता है. छोटी लापरवाही भी लंबे समय में बड़ा खर्च बन सकती है. सही सेटिंग और नियमित देखभाल से फ्रिज बेहतर प्रदर्शन करता है और बिजली बिल पर भी नियंत्रण रहता है.
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