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कभी सोचा है दवाइयों की पैकिंग सिल्वर तो कोई ट्रांसपेरेंट में क्यों आती है? जानकर चौंक जाएंगे आप

दवाइयों की अलग-अलग पैकेजिंग उनकी प्रकृति और सुरक्षा जरूरतों पर निर्भर करती है. एल्युमिनियम पैकिंग दवाइयों को नमी, हवा और रोशनी से बचाकर ज्यादा सुरक्षित बनाती है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
कभी सोचा है दवाइयों की पैकिंग सिल्वर तो कोई ट्रांसपेरेंट में क्यों आती है? जानकर चौंक जाएंगे आप
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: दवाइयों की पैकिंग को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि आखिर कुछ दवाएं सिल्वर पैकेट में क्यों आती हैं और कुछ ट्रांसपेरेंट पैक में. दरअसल इसके पीछे वैज्ञानिक और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण कारण होते हैं. हर दवा की प्रकृति अलग होती है और उसी के अनुसार उसकी पैकेजिंग तय की जाती है.

मेडिकल और फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में दवाइयों की गुणवत्ता और सुरक्षा सबसे ज्यादा अहम मानी जाती है. दवा बनने के बाद उसे सही तरीके से सुरक्षित रखना उतना ही जरूरी होता है, जितना उसका निर्माण. अगर पैकिंग सही न हो तो दवा की असर क्षमता कम हो सकती है या वह खराब भी हो सकती है.

क्या होता है इसका कारण?

दरअसल कई दवाइयां ऐसी होती हैं जो हवा, नमी, रोशनी और गर्मी के संपर्क में आते ही खराब होने लगती हैं. ऐसे में उन्हें सुरक्षित रखने के लिए खास तरह की पैकेजिंग की जरूरत होती है. यही कारण है कि फार्मा कंपनियां अलग-अलग तरह के मटेरियल का इस्तेमाल करती हैं.

पहले के समय में कैसे होती थी पैकिंग?

पहले के समय में दवाइयों की पैकिंग कागज में की जाती थी लेकिन कागज हवा और नमी को रोक नहीं पाता था. इसके बाद प्लास्टिक यानी PVC का इस्तेमाल शुरू हुआ, जो कागज से बेहतर था लेकिन पूरी तरह सुरक्षित नहीं था. समय के साथ शोध में यह सामने आया कि दवाइयों के लिए एक ऐसा मटेरियल चाहिए जो बाहरी तत्वों को पूरी तरह रोक सके.

यहीं से एल्युमिनियम पैकेजिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा. एल्युमिनियम एक ऐसा धातु है जो न तो दवाइयों के साथ रिएक्ट करता है और न ही हवा या नमी को अंदर जाने देता है. इसकी वजह से दवाइयों की शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है.

एल्युमिनियम पैकिंग की क्या है खासियत?

एल्युमिनियम पैकिंग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह सील होती है. यह नमी, हवा, धूप और बैक्टीरिया से दवाइयों को बचाती है. इसके अलावा यह हल्का, मजबूत और आसानी से किसी भी आकार में ढलने वाला मटेरियल है. यही कारण है कि इसे ब्लिस्टर पैक यानी दवाइयों की पट्टियों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है.

ट्रांसपेरेंट पैक का इस्तेमाल उन दवाइयों में किया जाता है, जिन्हें रोशनी या हवा से ज्यादा खतरा नहीं होता. इससे दवा को देखना आसान होता है और उसकी पहचान जल्दी हो जाती है.

आज के समय में एल्युमिनियम को सबसे सुरक्षित पैकेजिंग विकल्प माना जाता है. हालांकि इसकी लागत थोड़ी ज्यादा होती है, लेकिन यह दवाइयों को लंबे समय तक सुरक्षित रखता है. यही वजह है कि फार्मा इंडस्ट्री में इसका उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है.