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मकान मालिक की हर शर्त मानना जरूरी नहीं, जानें क्या-क्या हैं किराएदार के अधिकार

किराएदारों को अपने अधिकार जानना जरूरी है. मकान मालिक मरम्मत, समय या निजी स्वतंत्रता पर पूरी तरह नियंत्रण नहीं रख सकता. रेंट एग्रीमेंट सबसे अहम दस्तावेज होता है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
मकान मालिक की हर शर्त मानना जरूरी नहीं, जानें क्या-क्या हैं किराएदार के अधिकार
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: अगर आप किराए के घर में रहते हैं, तो यह जानना बेहद जरूरी है कि मकान मालिक हर चीज पर रोक नहीं लगा सकता. भारत में किरायेदारी से जुड़े कई नियम रेंट एग्रीमेंट के आधार पर तय होते हैं, लेकिन कुछ सामान्य अधिकार ऐसे भी हैं जिन्हें कोई मकान मालिक नजरअंदाज नहीं कर सकता. इन्हीं अधिकारों की जानकारी न होने के कारण अक्सर किराएदार और मकान मालिक के बीच विवाद हो जाता है.

सबसे पहले बात करें घर में मौजूद सुविधाओं की. अगर मकान मालिक ने घर देते समय पंखा, लाइट, गीजर या अन्य बेसिक सुविधाएं दी हैं, तो उनकी मरम्मत की जिम्मेदारी आमतौर पर मकान मालिक की होती है. यानी अगर कोई फिटिंग खराब हो जाती है, तो उसे ठीक करवाना मालिक का काम है. हालांकि, अगर नुकसान किराएदार की गलती या गलत इस्तेमाल से हुआ है, तो खर्च उसे उठाना होगा. वहीं, किराएदार द्वारा खुद लगाए गए सामान जैसे फ्रिज, वॉशिंग मशीन या कूलर की जिम्मेदारी पूरी तरह उसी की होती है.

क्या है नियमों का उल्लंघन?

अब बात करते हैं लेट नाइट पार्टी की. कई लोग सोचते हैं कि मकान मालिक की अनुमति मिल गई तो वे कुछ भी कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. अगर पार्टी के कारण ज्यादा शोर होता है या पड़ोसियों को परेशानी होती है, तो यह नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. ऐसी स्थिति में सोसाइटी या पुलिस कार्रवाई कर सकती है. यानी आपकी स्वतंत्रता वहीं तक सीमित है जहां तक दूसरों को परेशानी न हो.

आने-जाने के समय को लेकर क्या है नियम?

तीसरा और सबसे अहम मुद्दा है घर आने-जाने का समय. कई मकान मालिक किराएदारों के लिए समय तय करने की कोशिश करते हैं, जैसे रात में एक निश्चित समय के बाद घर आने पर रोक लगाना. लेकिन यह पूरी तरह गलत है. किसी भी किराएदार की निजी स्वतंत्रता और प्राइवेसी का सम्मान करना जरूरी है. मकान मालिक इस तरह का नियम लागू नहीं कर सकता. हां, अगर सोसाइटी के कुछ सामान्य सुरक्षा नियम हैं, जैसे गेट बंद होने का समय, तो उनका पालन करना जरूरी हो सकता है.

इन सभी बातों से साफ है कि किराएदारों के भी उतने ही अधिकार होते हैं जितने मकान मालिक के. इसलिए घर लेने से पहले रेंट एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है. इसमें साफ तौर पर जिम्मेदारियां और नियम लिखे होते हैं, जिससे आगे चलकर विवाद से बचा जा सकता है.