बीते तीन दशक यानी पिछले 30 सालों में प्राकृतिक आपदाओं की वजह से किसानों को 316.4 लाख करोड़ का नुकसान हुआ है. इसका खुलासा खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा जारी एक रिपोर्ट में किया गया है.
एफएओ की ओर से जारी की गई नई रिपोर्ट 'द इम्पैक्ट ऑफ डिसास्टर्स ऑन एग्रीकल्चर एंड फूड सिक्योरिटी' में बताया गया है कि प्राकृतिक आपदाओं के चलते पिछले 30 सालों से हर साल औसतन 6.9 करोड़ टन की फसल का नुकसान हो रहा है. ये डाटा फ्रांस की फसल के उत्पादन के बराबर है. यानी 6.9 करोड़ टन की पैदावर फ्रांस करता है.
अलग-अलग प्रकार की फसलों में किसानों को असमय आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के चलते नुकसान उठाना पड़ता है. फल, सब्जियों और गन्ने की फसल की नुकसान की बात करें तो यह 4 करोड़ टन है. यह डाटा जापान और वियतनाम में 2021 में किए गए फलों और सब्जियों के बराबर है.
प्राकृतिक आपदाओं के चलते प्रत्येक वर्ष करीब 1.6 करोड़ टन मांस, अंडे और डेयरी उत्पाद का नुकसान हो रहा है. ये आंकड़ा भारत और मैक्सिको में साल 2021 में हुए उत्पादन के बराबर है. ऐसे में आप अंदाजा लगा सकते हैं कि मौसम की मार की वजह से किसानों को हर साल कितना नुकसान झेलना पड़ता है. इन आपदाओं से हजारों करोड़ों रुपए का नुकसान होता है.
एफएओ की रिपोर्ट 'द इम्पैक्ट ऑफ डिसास्टर्स ऑन एग्रीकल्चर एंड फूड सिक्योरिटी' की मानें तो कमजोर किसानों को अधिक नुकसान उठाना पड़ता है. एक तो पहली बात उनके पास जमीन कम होती है. ऐसे में जब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं तो गरीब किसानों की फसल चौपट हो जाती है.
रिपोर्ट के आंकड़ों की बात करें तो हर साल सबसे ज्यादा नुकसान एशिया के किसानों को होता है. एशिया के बाद अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका के किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है.
रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले 3 दशक के पिछले 70 दशक में हर साल 100 प्राकृतिक आपदाएं आती थी. पिछले 3 दशक में इनकी संख्या बढ़कर 300 हो गई है.
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