पत्नी के नाम पर खरीद रहे हैं सोना? बेचने पर किसके नाम लगेगा टैक्स, जानें इनकम टैक्स के नियम

पत्नी के नाम पर पति की कमाई से सोना खरीदने पर तुरंत टैक्स नहीं लगता. हालांकि, बिक्री से होने वाला मुनाफा क्लबिंग नियमों के तहत पति की आय में जुड़ सकता है.

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Sagar Bhardwaj

धनतेरस पर पत्नी के नाम से सोना खरीदना भारत में आम परंपरा है. कई पति अपनी कमाई से सोने के गहने, सिक्के या गोल्ड बार खरीदते हैं, लेकिन उनकी खरीद पत्नी के नाम पर दर्ज कराते हैं. ऐसा करने पर तुरंत कोई इनकम टैक्स नहीं लगता, लेकिन भविष्य में सोना बेचने पर टैक्स की जिम्मेदारी पैदा हो सकती है. इसमें सबसे अहम बात यह है कि सोना खरीदने के लिए पैसे किसने दिए हैं.

 पति की कमाई से खरीदे सोने पर किसे देना होगा टैक्स?

अगर पति अपनी कमाई से पत्नी के नाम पर सोना खरीदता है या उसे पैसे उपहार में देकर सोना खरीदने के लिए देता है, तो इनकम टैक्स के क्लबिंग नियम लागू हो सकते हैं. इसका मतलब है कि सोना बेचने से होने वाला मुनाफा पत्नी की जगह पति की आय में जोड़ा जा सकता है.

चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी रिचा कुमारी के मुताबिक, आयकर अधिनियम 2025 की धारा 99 के तहत बिना पर्याप्त भुगतान के जीवनसाथी को ट्रांसफर की गई संपत्ति से होने वाली आय पति की आय में जोड़ी जा सकती है.


वहीं, ClearTax की टैक्स विशेषज्ञ चांदनी आनंद के अनुसार, अगर पत्नी ऐसे सोने को बेचकर मुनाफा कमाती है, तो क्लबिंग के प्रावधान लागू होंगे. हालांकि, पत्नी अपनी कमाई या पति से मिलने वाले व्यक्तिगत और घरेलू खर्च के भत्ते (पिन मनी) से सोना खरीदती है, तो यह नियम लागू नहीं होगा.

पत्नी को पति से मिले पैसों पर गिफ्ट टैक्स लगेगा?

आयकर कानून के तहत पति-पत्नी एक-दूसरे के रिश्तेदार की श्रेणी में आते हैं. इसलिए पति की ओर से पत्नी को दिया गया पैसा गिफ्ट के रूप में टैक्स फ्री होता है. इस पर कोई मौद्रिक सीमा भी तय नहीं है.

हालांकि, पैसे का गिफ्ट टैक्स फ्री होने का मतलब यह नहीं है कि उससे खरीदे गए सोने को बेचने पर होने वाला मुनाफा भी पत्नी के लिए टैक्स फ्री होगा. अगर पत्नी ने पति से मिले पैसों से सोना खरीदा है, तो उसे बेचने पर होने वाला कैपिटल गेन पति की आय में जोड़ा जा सकता है.

सोना बेचने पर कितना देना होगा कैपिटल गेन टैक्स?

सोना बेचने पर लगने वाला टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि उसे कितने समय तक अपने पास रखा गया था. अगर सोने के गहने, सिक्के या गोल्ड बार 24 महीने या उससे कम समय तक रखे गए हैं, तो इसे शॉर्ट टर्म कैपिटल एसेट माना जाएगा. इससे होने वाले मुनाफे पर संबंधित व्यक्ति की इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा.

वहीं, अगर सोना 24 महीने से ज्यादा समय तक रखा गया है, तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट माना जाएगा. ऐसे में मुनाफे पर 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगेगा. इसमें इंडेक्सेशन का लाभ नहीं मिलेगा.

कैपिटल गेन की गणना करते समय सोने को बेचने से मिली रकम में से उसकी मूल खरीद कीमत और बिक्री से जुड़े पात्र खर्च घटाए जाते हैं. इसके बाद बची रकम पर टैक्स की गणना होती है.

इनकम टैक्स विभाग के सवालों से बचने के लिए रखें ये दस्तावेज

पत्नी के नाम पर सोना खरीदना अपने आप में आयकर नियमों का उल्लंघन नहीं है. हालांकि, अगर पत्नी की घोषित कमाई की तुलना में सोने की खरीदारी बहुत ज्यादा है, तो आयकर विभाग पैसों के स्रोत के बारे में सवाल पूछ सकता है.

रिचा कुमारी के मुताबिक, ऐसी स्थिति से बचने के लिए पति-पत्नी को सोने की खरीद के बिल, भुगतान की रसीद, बैंक स्टेटमेंट और पैसे गिफ्ट करने से जुड़े दस्तावेज संभालकर रखने चाहिए.

उन्होंने बताया कि आयकर अधिनियम 2025 की धारा 103 और 104 में अघोषित निवेश और संपत्ति से जुड़े प्रावधान हैं. अगर पत्नी सोना खरीदने में इस्तेमाल किए गए पैसों का संतोषजनक स्रोत नहीं बता पाती है, तो उस निवेश को अघोषित निवेश माना जा सकता है.

चांदनी आनंद ने भी पति से पत्नी के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर होने का रिकॉर्ड रखने की सलाह दी है. इसके साथ खरीदारी के बिल और जरूरत पड़ने पर वैल्यूएशन सर्टिफिकेट भी संभालकर रखना चाहिए.