'AI बढ़ाएगा अमीरी-गरीबी के बीच खाई, जॉब और इनकम पर पड़ेगा खतरनाक प्रभाव', क्या कहता है आर्थिक सर्वेक्षण?
Budget 2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक दिन पहले संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया. इसमें AI से लेकर FDI तक का भी जिक्र किया गया. AI से नौकरियों पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बात की गई. कहा गया है कि AI से कुछ क्षेत्रों में नौकरियों पर प्रभाव पड़ना तय है. साथ ही पड़ोसी देश चीन से बढ़ते कारोबार घाटा को लेकर FDI की भी वकालत की गई. ये वकालत ऐसे वक्त में की गई है, जब भारत और चीन के बीच सीमा विवाद जारी है.
Budget 2024: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक दिन पहले संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया. इसमें कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से नौकरियों पर प्रभाव पड़ना निश्चित है. इसे एक चुनौती के तौर पर बताया गया है. हालांकि, इस टेक्नोलॉजी के जरिए प्रोडक्टिविटी बढ़ने की भी बात कही गई है. यानी, AI के जरिए नौकरियों पर इसके प्रभाव के बारे में अनिश्चितता बनी हुई है.
आर्थिक सर्वेक्षण को मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन के नेतृत्व में तैयार किया गया है. उन्होंने अमीरी-गरीबी के बीच की खाई के प्रति अपनी संवेदनशीलता का भी संकेत दिया. संभावित समाधान के रूप में टैक्स पॉलिसी की भूमिका को चिह्नित किया. साथ ही AI को एक खतरनाक बताया, जो चुनौती को बढ़ा सकता है. ये भी कहा गया कि एआई जैसी तकनीक से जॉब और इनकम पर अधिक खतरनाक प्रभाव पड़ सकता है.
आर्थिक सर्वेक्षण में बेशक, रोजगार को एक चुनौती के रूप में पहचाना गया है. 400 से अधिक पेज के डॉक्युमेंट्स में 2030 तक सालाना 78.5 लाख गैर-कृषि नौकरियों का सृजन करने की जरूरत पर जोर दिया गया है, जबकि यह सुझाव दिया गया है कि केंद्र अकेले इस मुद्दे से नहीं निपट सकता है. कहा गया कि रोजगार सृजन मुख्य रूप से निजी क्षेत्र में होता है. दूसरा, कई (सभी नहीं) मुद्दे जो आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और उत्पादकता को प्रभावित करते हैं और इसके लिए की जाने वाली कार्रवाई राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में हैं.
कारोबार घटा और FDI को लेकर आर्थिक सर्वेक्षण में क्या?
इसके अलावा, आर्थिक सर्वेक्षण ने चीन पर नीति की ओर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है. सर्वेक्षण में तर्क दिया गया है कि पड़ोसी देश से FDI को बढ़ावा देना, बढ़ते व्यापार के घाटे को पाटने में मदद कर सकता है. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने चीन से FDI की मांग की वकालत की. उनके मुताबिक, चीन के साथ भारत का करीब 80 से 90 अरब अमेरिकी डॉलर का कारोबार घाटा है. उन्होंने इसे कम करने के लिए आयात में निर्भरता कम करने और FDI की मांग के बीच संतुलन बनाने का सुझाव दिया. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि ब्राजील और तुर्की ऐसे देश हैं, जिन्होंने चीन से ईवी यानी इलेक्ट्रिक गाड़ियों के आयात पर बैन लगाया है, लेकिन चीन की कंपनियों को अपने देशों में प्लांट लगाकर ऐसी गाड़ियों के प्रोडक्शन के लिए प्रोत्साहित भी किया है.
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने आंकड़ों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि चूंकि भारत का जीडीपी 1993 से 12 गुना बढ़ा है, प्रति व्यक्ति आय भी वित्त वर्ष 1990 और वित्त वर्ष 2024 के बीच 7 गुना बढ़ गई है. नागेश्वरन ने इस प्रवृत्ति के जारी रहने का भरोसा जताया और 2047 तक स्वस्थ विकास दर का अनुमान लगाया.
एक दिन पहले पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण का उद्देश्य पिछले वित्तीय वर्ष का आधिकारिक लेखा-जोखा पेश करना था. आर्थिक सर्वेक्षण ने अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताया. ये सर्वेक्षण पिछले कई सर्वेक्षणों से अलग रहा, क्योंकि इसमें स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया कि सरकार को एक चौथाई सदी से अधिक समय तक सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए कई बाधाओं से निपटना होगा.
आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर पीएम मोदी और अमित शाह ने क्या कहा?
आर्थिक सर्वेक्षण को लेकर पीएम मोदी ने एक्स पोस्ट में कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण हमारी अर्थव्यवस्था की मौजूदा ताकत को उजागर करता है और हमारी सरकार द्वारा लाए गए विभिन्न सुधारों के परिणामों को भी प्रदर्शित करता है. यह आगे विकास और प्रगति के क्षेत्रों की भी पहचान करता है क्योंकि हम एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ते हैं. वहीं, अमित शाह ने एक्स पोस्ट में लिखा कि पिछले 10 वर्षों में पीएम मोदी की दूरदर्शी नीतियों ने भारत को आर्थिक विकास के शिखर पर पहुंचा दिया है. सर्वेक्षण में भारत के सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने का दस्तावेजीकरण किया गया है, साथ ही विकसित राष्ट्र के रूप में उभरने के लिए इसके भविष्य की रूपरेखा को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया है.