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खिड़की से बनेगी बिजली! घर की छत पर सोलर पैनल लगाने की जरूरत खत्म

घर की बिजली का बिल कम करने के लिए आजकल लोग छत पर सोलर पैनल लगाते हैं, लेकिन शहरों में रहने वाले कई लोगों के पास छत पर इतनी जगह नहीं होती कि वे सोलर पैनल लगा सकें.

Shilpa Shrivastava
खिड़की से बनेगी बिजली! घर की छत पर सोलर पैनल लगाने की जरूरत खत्म
Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: घर की बिजली का बिल कम करने के लिए आजकल लोग छत पर सोलर पैनल लगाते हैं, लेकिन शहरों में रहने वाले कई लोगों के पास छत पर इतनी जगह नहीं होती कि वे सोलर पैनल लगा सकें. इसी समस्या को देखते हुए ट्रांसपेरेंट सोलर पैनल जैसी नई तकनीक काफी चर्चा में है. खास बात यह है कि इसे खिड़की के कांच की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है और इससे बिजली भी बनाई जा सकती है.

क्या होता है ट्रांसपेरेंट सोलर पैनल?

ट्रांसपेरेंट सोलर पैनल देखने में नॉर्मल कांच जैसा होता है. इसकी खासियत यह है कि यह पारदर्शी होता है और इसके दूसरी तरफ देखा जा सकता है. इसके बावजूद यह सूरज की रोशनी से बिजली बनाने में सक्षम होता है. नॉर्मल सोलर पैनल सूरज की रोशनी को सीधे बिजली में बदलने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. वहीं, ट्रांसपेरेंट सोलर पैनल में खास तरह के मैटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है, जो रोशनी के कुछ ऐसे हिस्सों को पकड़ते हैं जिन्हें इंसानी आंखें नहीं देख पातीं.

कैसे बनती है बिजली?

सूरज की रोशनी में अलग-अलग तरह की किरणें होती हैं. ट्रांसपेरेंट सोलर पैनल खास तौर पर यूवी और इंफ्रारेड लाइट को पकड़कर उसका इस्तेमाल बिजली बनाने में करता है. इस वजह से कांच पारदर्शी दिखाई देता है और साथ ही बिजली बनाने का काम भी करता रहता है. यानी एक ही खिड़की से बाहर का नजारा भी देखा जा सकता है और उससे बिजली भी बनाई जा सकती है.

कहां किया जा सकता है इस्तेमाल?

इस तकनीक का सबसे ज्यादा फायदा शहरों और बड़ी कांच वाली इमारतों में हो सकता है. जहां छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है, वहां खिड़कियों या कांच की दीवारों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है. ऑफिस, मॉल, अपार्टमेंट और दूसरी बड़ी इमारतों में भी भविष्य में इसका इस्तेमाल बढ़ सकता है.

क्या यह सामान्य Solar Panel से बेहतर है?

फिलहाल ट्रांसपेरेंट सोलर पैनल बिजली बनाने की क्षमता के मामले में सामान्य सोलर पैनल से आगे नहीं हैं. लेकिन कम जगह में बिजली बनाने की क्षमता के कारण यह तकनीक भविष्य में काफी उपयोगी साबित हो सकती है. खासकर तेजी से बढ़ते शहरों में यह क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने का एक नया तरीका बन सकती है.