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Direct To Cell Starlink: बिना सिम के कॉल करने में मदद करेगा आसमान में लगा मोबाइल टावर

Direct To Cell: एलन मस्‍क की कंपनी स्‍टारलिंक ने डायरेक्‍ट-टू-सेल (DTC) तकनीक पेश की है, जो स्मार्टफोन को सीधे सैटेलाइट से जोड़ती है. इस तकनीक के तहत न तो सिम कार्ड और न ही मोबाइल टावर की जरूरत होगी. स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से सिग्नल प्राप्त कर कॉल, टेक्स्ट और इंटरनेट सर्विसेज इस्तेमाल कर सकेंगे.

Shilpa Shrivastava
Direct To Cell Starlink: बिना सिम के कॉल करने में मदद करेगा आसमान में लगा मोबाइल टावर

Direct To Cell: अमेरिकी अरबपति एलन मस्‍क की कंपनी स्‍टारलिंक ने एक नई तकनीक पेश की है, जिसका नाम है डायरेक्‍ट-टू-सेल (DTC). इस तकनीक के तहत अब मोबाइल फोन से कॉल, टेक्स्ट और इंटरनेट का उपयोग करने के लिए न तो सिम कार्ड की जरूरत होगी और न ही किसी मोबाइल टावर की. आसान शब्दों में, डायरेक्‍ट-टू-सेल तकनीक एक सैटेलाइट कम्यूनिकेशन सिस्टम है, जो स्मार्टफोन को सीधे सैटेलाइट से जोड़ती है, जिससे यूजर्स बिना किसी ट्रेडिशनल मोबाइल टावर के कॉल और टेक्स्ट भेज सकते हैं, और इंटरनेट का इस्तेमाल भी कर सकते हैं.

इस तकनीक के लिए किसी खास मोबाइल हैंडसेट की जरूरत नहीं होगी और न ही मोबाइल फोन में कोई स्पेशल हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर डालने की आवश्यकता होगी. मतलब, आपके पास जो भी मोबाइल है, वह सीधे सैटेलाइट से जुड़ने में कनेक्ट होगा. इस तकनीक में इस्तेमाल किए जाने वाले सैटेलाइट्स में खासतौर पर eNodeB मोडेम होते हैं, जो मोबाइल फोन टावर की तरह काम करते हैं, लेकिन ये मोडेम अंतरिक्ष में होते हैं. ये सैटेलाइट्स सीधे स्मार्टफोनों को सिग्नल भेजते हैं, जिससे दूरदराज के इलाकों में भी कनेक्टिविटी मिल सकती है.

स्टारलिंक की डायरेक्‍ट-टू-सेल सर्विस का पहला सेट 2 जनवरी 2024 को लॉन्च किया गया था, लेकिन इस समय केवल टेक्स्ट भेजने की सुविधा उपलब्ध है. इस सर्विस को 2025 तक पूरी तरह से एक्टिव किया जाएगा, जिसमें टेक्स्टिंग, कॉलिंग और डाटा सर्विसेज शामिल होंगी. स्टारलिंक इस सर्विस के लिए स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट और स्टारशिप पर डायरेक्ट-टू-सेल सैटेलाइट्स को लॉन्च कर रहा है. ये सैटेलाइट्स ग्लोबल कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए स्टारलिंक के कॉन्स्टलेशन से जुड़ेंगे और लेजर बैकहॉल के जरिए कनेक्शन बनाएंगे. 

एलन मस्‍क की कंपनी ने कई देशों के टेलीकॉम ऑपरेटरों के साथ साझेदारी की है जिससे इस तकनीक को बड़े लेवल पर लागू किया जा सकेगा. इसके तहत टी-मोबाइल (यूएसए), ऑप्टस (ऑस्ट्रेलिया), रोजर्स (कनाडा) और कई अन्य देशों के टेलीकॉम ऑपरेटर शामिल हैं. इन साझेदारियों से यह टेक्नोलॉजी कई देशों में यूजर्स को बेहतर कनेक्टिविटी देने में मदद करेगी.