एक ऐसी जगह जहां कानून नहीं चलता…! समझें Dark Web का पूरा गणित
अगर आप डार्क वेब के बारे में नहीं जानते हैं, तो यहां हम आपको यह क्या है और यह कितना खतरनाक है, इसके बारे में बता रहे हैं.
नई दिल्ली: आजकल हैकिंग, स्कैमिंग कितनी ज्यादा बढ़ गई है, ये तो आप सभी जानते हैं. जहां सुनो, बस स्कैम ही हो रहा है. लोगों को इतना सचेत करने के बाद भी कई बार ये स्कैम उन तक पहुंच ही जाता है. जब भी स्कैमिंग के बारे में बात की जाती है, तो डार्क वेब का भी जिक्र होता है. हालांकि, कई लोगों को इसके बारे में ज्यादा पता नहीं होता है. यहां हम आपको आसान भाषा में डार्क वेब के बारे में बता रहे हैं, जिससे आप इसके चक्कर में न पड़ जाएं.
डार्क वेब बेहद ही खतरनाक है क्योंकि यह एक ऐसी जगह है, जहां पर गुमनाम तरह से गैर-कानूनी काम किए जाते हैं. इसमें चोरी किया गया डाटा, ड्रग्स, हथियरा और मैलवेयर जैसी चीजों की नीलामी की जाती है. कई बार सुना गया है कि यूजर डाटा की यहां पर बोली भी लगाई जाती है. यहां पर यूजर्स की निजी जानकारी हैकर्स के सामने आने, कंप्यूटर का वायरस की चपेट में आने, बिना किसी कानूनी मदद के स्कैम का शिकार हो जाने का खतरा बना रहता है.
डार्क वेब के मुख्य खतरे क्या हैं?
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मैलवेयर और हैकिंग: इस तरह की साइटों में अक्सर कुछ इस तरह के सॉफ्टवेयर होते हैं, जो आपके सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इनमें कीलॉगर, स्पाईवेयर, रैंसमवेयर आदि शामिल होते हैं.
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डाटा चोरी और आईडेंटिटी थेफ्ट: यहां से यूजर्स की निजी जानकारी जैसे पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर समेत कई डिटेल्स को लीक किया जा सकता है.
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गैर-कानूनी मार्केट: डार्क वेब पर सिर्फ डाटा ही नहीं बल्कि गैर-कानूनी ड्रग्स, हथियर और बैन्ड सर्विसेज भी मौजूद होती हैं.
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स्कैम और धोखाधड़ी: यहां पर किए गए लेन-देन गुमनाम होते हैं. यहां पर क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जाता है. यही कारण है कि अगर कोई यहां पर स्कैम का शिकार हो जाता है, तो उसके पास पैसे वापस पाने का कोई भी तरीका नहीं बचता है.
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अश्लील कंटेंट: यहां पर यूजर्स को कई ऐसा कंटेंट मिल जाता है, जो परेशान करने वाला होता है. यहां पर अश्लील या गैर-कानूनी कंटेंट मौजूद होता है.
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कानूनी जोखिम: डार्क वेब का एक्सेस गैर-कानूनी है. अगर आप इसके चक्कर में फंस जाते हैं तो आपको कानूनी जोखिम हो सकता है.
क्यों खतरनाक है डार्क वेब:
डार्क वेब एन्क्रिप्टेड नेटवर्क (जैसे Tor) पर काम करता है. यह यूजर की पहचान और आईपी एड्रेस को हाइड करता है. हालांकि, ऐसा कहा जाता है कि यह पत्रकारों या कार्यकर्ताओं जैसे सही यूजर्स को निजता देता है, लेकिन यह साइबर अपराधियों को भी कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा ट्रैक किए जाने से बचाता है.