1 जनवरी से होने जा रही है SIM बाइंडिंग, WhatsApp और Telegram यूजर्स पर क्या होगा असर?
भारत में 1 जनवरी 2027 से SIM बाइंडिंग नियम लागू करने की तैयारी है. इससे WhatsApp, Telegram और अन्य मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है.
भारत में WhatsApp, Telegram और दूसरे मैसेजिंग ऐप इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए SIM बाइंडिंग का नियम महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है. दूरसंचार विभाग (DoT) ने इन ऐप्स को भारतीय मोबाइल नंबर से जुड़े खातों की संबंधित SIM के साथ लिंकिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. इसका उद्देश्य डिजिटल धोखाधड़ी पर लगाम लगाना और मोबाइल नंबर के दुरुपयोग को रोकना है.
इस व्यवस्था के तहत, जिस मोबाइल नंबर से आपका मैसेजिंग अकाउंट जुड़ा है, उसकी सक्रिय SIM संबंधित फोन में मौजूद होनी चाहिए. हालांकि, नियमों को लागू करने का तरीका अलग-अलग ऐप पर निर्भर करेगा. आइए समझते हैं कि SIM बाइंडिंग क्या है और इससे आपके WhatsApp, Telegram समेत दूसरे ऐप्स के इस्तेमाल पर क्या असर पड़ सकता है.
SIM बाइंडिंग क्या है
SIM बाइंडिंग का मतलब है कि मैसेजिंग ऐप पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की SIM उसी डिवाइस में मौजूद हो, जिस पर संबंधित अकाउंट इस्तेमाल किया जा रहा है. दूरसंचार विभाग ने 28 नवंबर 2025 को इस संबंध में निर्देश जारी किया था. इसके तहत WhatsApp, Telegram, Snapchat और अन्य संबंधित प्लेटफॉर्म को अपने खातों को पंजीकृत मोबाइल नंबर की सक्रिय SIM से जोड़े रखना होगा.
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अभी तक किसी ऐप पर मोबाइल नंबर को OTP से सत्यापित करने के बाद SIM निकाल देने पर भी अकाउंट इस्तेमाल किया जा सकता है. उदाहरण के लिए, यदि आपने स्मार्टफोन में WhatsApp चालू किया है, तो बाद में उसी अकाउंट को SIM के बिना टैबलेट या किसी अन्य डिवाइस पर इंटरनेट के जरिए इस्तेमाल करना संभव हो सकता है. नए नियमों के लागू होने पर ऐसी सुविधा प्रभावित हो सकती है. बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट ऐप्स में SIM से जुड़ी सुरक्षा जांच पहले से इस्तेमाल होती है. UPI से भुगतान करते समय भी संबंधित मोबाइल नंबर की SIM और डिवाइस का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है.
SIM बाइंडिंग नियम कैसे लागू होंगे?
दूरसंचार विभाग के निर्देशों के मुताबिक, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करना होगा कि अकाउंट से जुड़ी SIM सक्रिय हो और संबंधित डिवाइस में मौजूद रहे. इन निर्देशों के दायरे में WhatsApp, Telegram, Snapchat, Arattai, ShareChat, Josh, JioChat और Signal जैसे ऐप शामिल हैं.
प्लेटफॉर्म को 31 दिसंबर 2026 तक निर्धारित व्यवस्था लागू करने के लिए समय दिया गया है. इसके बाद नियमों का पालन किस तरह सुनिश्चित किया जाएगा, यह संबंधित ऐप की तकनीकी व्यवस्था और अनुपालन प्रक्रिया पर निर्भर करेगा. इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि 1 जनवरी 2027 को सभी ऐप्स पर हर अकाउंट अपने आप बंद हो जाएगा.
WhatsApp और Telegram चलाने के तरीके में क्या बदलाव होगा?
नियम लागू होने के बाद WhatsApp और Telegram इस्तेमाल करने वाले लोगों को अपने रजिस्टर्ड नंबर की SIM संबंधित फोन में रखनी पड़ सकती है. जिन लोगों के अकाउंट ऐसे डिवाइस पर चलते हैं, जिनमें उनकी रजिस्टर्ड SIM मौजूद नहीं है, उन्हें परेशानी हो सकती है.
रिपोर्ट के मुताबिक, WhatsApp ने Android पर SIM बाइंडिंग से जुड़ी सुविधा का बीटा परीक्षण शुरू किया था. वहीं, Apple ने सितंबर में iOS का एक सॉफ्टवेयर अपडेट जारी किया, जो iPhone में SIM मौजूद न होने की स्थिति का पता लगाने में मदद करता है. हालांकि, इन तकनीकी बदलावों के आधार पर सभी ऐप्स के अंतिम नियमों या पाबंदियों के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.
WhatsApp Web पर हर छह घंटे में लॉगआउट जरूरी नहीं
SIM बाइंडिंग से जुड़े शुरुआती निर्देशों में WhatsApp Web जैसे वेब सेशन को हर छह घंटे में लॉगआउट करने का प्रावधान भी शामिल था. इसके बाद यूजर को QR कोड स्कैन करके दोबारा डिवाइस लिंक करना पड़ता.
हालांकि, दूरसंचार विभाग ने बाद में हर छह घंटे में अनिवार्य लॉगआउट की शर्त वापस ले ली और इसकी जगह जोखिम के आधार पर लॉगआउट करने की व्यवस्था अपनाई. संदिग्ध धोखाधड़ी के मामलों में सेशन तुरंत समाप्त किया जा सकता है. इसलिए यूजर्स को यह नहीं मानना चाहिए कि WhatsApp Web हर छह घंटे में अपने आप लॉगआउट हो जाएगा.
eSIM और केवल Wi-Fi वाले डिवाइस का क्या होगा?
SIM बाइंडिंग के निर्देशों में eSIM के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है. eSIM फोन में डिजिटल रूप से सक्रिय होती है, इसलिए संभावना है कि संबंधित अकाउंट इस्तेमाल करने के लिए उसी डिवाइस में रजिस्टर्ड नंबर की सक्रिय eSIM मौजूद रखनी पड़े. लेकिन इस संबंध में अंतिम तकनीकी व्यवस्था स्पष्ट होना बाकी है.
इस नियम का असर खासतौर पर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो Wi-Fi वाले टैबलेट पर WhatsApp या Telegram चलाते हैं, लेकिन उस डिवाइस में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर की SIM नहीं रखते. कई डिवाइस पर एक ही अकाउंट इस्तेमाल करने वाले लोगों को भी बदलावों का सामना करना पड़ सकता है.
विदेश यात्रा के दौरान स्थानीय SIM इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए भी यह नियम महत्वपूर्ण हो सकता है. यदि भारतीय नंबर की SIM संबंधित डिवाइस में मौजूद नहीं है, तो अकाउंट इस्तेमाल करने की सुविधा प्रभावित हो सकती है. हालांकि, विदेश में रहने वाले यूजर्स और eSIM के मामलों में अंतिम असर ऐप्स द्वारा अपनाई जाने वाली व्यवस्था पर निर्भर करेगा.
सरकार क्यों लागू करना चाहती है SIM बाइंडिंग?
दूरसंचार विभाग का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सुरक्षा से जुड़ी कुछ कमियां हैं. SIM निकालने या निष्क्रिय होने के बाद भी मैसेजिंग अकाउंट चलते रहने और लंबे समय तक सक्रिय वेब या डेस्कटॉप सेशन का फायदा साइबर अपराधी उठा सकते हैं. इससे भारत में सत्यापित मोबाइल नंबर से जुड़े अकाउंट का दूर बैठकर दुरुपयोग करना आसान हो सकता है.
विभाग के मुताबिक, ऐसी कमियों का इस्तेमाल फिशिंग, पहचान की नकल करके ठगी, निवेश और लोन से जुड़े फर्जीवाड़े तथा डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों में किया गया है.
सरकार के अनुसार, वर्ष 2024 में साइबर धोखाधड़ी के कारण 22,800 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था. SIM और डिवाइस बाइंडिंग का उद्देश्य अकाउंट पर अनधिकृत नियंत्रण रोकना, भारतीय मोबाइल नंबरों की पहचान सुनिश्चित करना और धोखाधड़ी की जांच में मदद करना है.
इसके अलावा, दूरसंचार विभाग वैध मोबाइल नंबरों की पहचान के लिए एक सत्यापन प्लेटफॉर्म तैयार करने की भी योजना बना रहा है. इससे संदिग्ध नंबरों और उनके संभावित दुरुपयोग की पहचान करने में सहायता मिल सकती है.
कुल मिलाकर, SIM बाइंडिंग का उद्देश्य मैसेजिंग ऐप्स की सुरक्षा बढ़ाना है, लेकिन इसका व्यावहारिक असर उन यूजर्स पर अधिक पड़ सकता है जो SIM के बिना या कई डिवाइस पर एक ही अकाउंट इस्तेमाल करते हैं. अंतिम बदलाव संबंधित ऐप्स के नियमों और लागू की जाने वाली तकनीकी व्यवस्था से स्पष्ट होंगे.