Meta पर सरकार का बड़ा एक्शन! Facebook-Instagram के एल्गोरिदम से लेकर Deepfake तक, 3 दिन की बैठक में दिए 7 सख्त आदेश

केंद्र सरकार ने तीन दिन की बैठक के बाद मेटा को डीपफेक, फर्जी खबरों और गैरकानूनी सामग्री पर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं. एल्गोरिदम, डेटा सुरक्षा और सरकारी एजेंसियों से समन्वय पर भी जोर दिया गया है.

social media
Kuldeep Sharma

सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे डीपफेक और भ्रामक सामग्री को लेकर सरकार ने मेटा के सामने सख्त रुख अपनाया है. तीन दिन चली बैठकों के बाद प्लेटफॉर्म से तकनीकी व्यवस्था मजबूत करने, संदिग्ध कंटेंट पर जल्द कार्रवाई करने और भारतीय यूजर्स के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है.

मेटा को दिए गए सात अहम निर्देश

सरकार ने मेटा से कहा है कि ऐसे एल्गोरिदम में बदलाव किया जाए, जो फर्जी या नुकसानदेह सामग्री को ज्यादा लोगों तक पहुंचाते हैं. कंटेंट मॉडरेशन में इंसानी निगरानी के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बेहतर इस्तेमाल करने और स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है.

डीपफेक तस्वीरों और वीडियो की पहचान के लिए नई तकनीक अपनाने, गैरकानूनी सामग्री पर तेजी से कार्रवाई करने तथा भारतीय डेटा से जुड़े स्थानीय नियमों का पालन करने पर भी जोर दिया गया है. सरकारी एजेंसियों से मिले टेकडाउन अनुरोधों पर देरी नहीं करने और साइबर अपराध व गलत सूचना से जुड़े मामलों में भारतीय एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क व्यवस्था बनाने का निर्देश भी दिया गया है.


यूजर्स पर क्या पड़ सकता है असर

इन बदलावों का असर फेसबुक, इंस्टाग्राम और दूसरे मेटा प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने वाले लोगों पर दिखाई दे सकता है. डीपफेक वीडियो, बदली हुई तस्वीरों और भ्रामक पोस्ट की पहचान पहले के मुकाबले तेजी से होने की उम्मीद है. महिलाओं और सार्वजनिक हस्तियों को निशाना बनाकर तैयार की जाने वाली नकली सामग्री पर भी निगरानी बढ़ सकती है.

इसके अलावा फर्जी निवेश योजनाओं और धोखाधड़ी वाले विज्ञापनों को रोकने की कोशिश तेज होगी. एआई से तैयार सामग्री की पहचान के लिए लेबलिंग व्यवस्था बेहतर होने पर यूजर्स के लिए असली और कृत्रिम सामग्री में अंतर करना आसान हो सकता है. हालांकि, इन बदलावों का वास्तविक असर मेटा की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर निर्भर करेगा.

डेटा सुरक्षा और शिकायतों पर भी नजर

सरकार की प्राथमिकताओं में भारतीय यूजर्स की निजी जानकारी की सुरक्षा भी शामिल है. ऐसे में मेटा को देश में लागू डेटा लोकलाइजेशन से जुड़े नियमों का पालन करना होगा. यूजर्स को भी संदिग्ध लिंक, फर्जी विज्ञापन और सनसनीखेज पोस्ट से सावधान रहने की जरूरत है. किसी संदिग्ध सामग्री की जानकारी प्लेटफॉर्म के आधिकारिक रिपोर्टिंग विकल्प के जरिए दी जा सकती है.

बैंक खाते की जानकारी, पासवर्ड, यूपीआई पिन और ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारी सोशल मीडिया पर किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए. सरकार और मेटा के बीच हुई बैठकों के बाद अब निगरानी और कंटेंट मॉडरेशन की व्यवस्था पर नजर रहेगी. आने वाले समय में कंपनी की ओर से उठाए गए कदम इस पूरी प्रक्रिया की दिशा तय करेंगे.