Apple और Samsung सहित अन्य स्मार्टफोन कंपनियों को सरकार के आदेश, सभी लॉन्च किए जाने वाले फोन्स में पहले से इंस्टॉल हो ये ऐप
भारत सरकार ने सभी नए स्मार्टफोन्स में अनिवार्य रूप से संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल करने का आदेश दिया है. यह ऐप न हटाया जा सकेगा और साइबर ठगी रोकने, खोए फोन ट्रैक करने तथा फर्जी डिवाइस पहचानने में मदद करेगा.
नई दिल्ली: भारत में बढ़ते साइबर अपराध और मोबाइल धोखाधड़ी को देखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्र ने सभी प्रमुख स्मार्टफोन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने नए फोनों में सरकारी साइबर सुरक्षा ऐप संचार साथी को पहले से इंस्टॉल करके बेचें.
यह ऐप न केवल डिवाइस सुरक्षा बढ़ाएगा बल्कि चोरी हुए और फर्जी फोनों को ब्लॉक करने में भी अहम भूमिका निभाएगा. सरकार का दावा है कि यह कदम मोबाइल उपभोक्ताओं को ठगी और पहचान चोरी से काफी हद तक बचाएगा.
सरकार का अनिवार्य आदेश
सरकार ने 28 नवंबर को जारी आदेश में स्पष्ट किया कि संचार साथी ऐप को हर नए स्मार्टफोन में प्री-इंस्टॉल होना चाहिए और उपयोगकर्ता इसे न तो हटाएंगे और न ही डिसेबल कर पाएंगे. बड़े ब्रांड्स- एप्पल, सैमसंग, शाओमी, वीवो, ओप्पो और वनप्लस को 90 दिनों के भीतर नियम लागू करने के लिए कहा गया है. सप्लाई चैन में मौजूद डिवाइस पर कंपनियों को यह ऐप सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए भेजना होगा.
संचार साथी क्या है और कैसे काम करता है
संचार साथी ऐप जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था. यह ऐप मोबाइल सुरक्षा के लिए एक केंद्रीकृत टूल की तरह काम करता है, जो खोए या चोरी हुए फोनों को ब्लॉक और ट्रैक करने में मदद करता है. उपयोगकर्ता अपने नाम पर खुली फर्जी मोबाइल कनेक्शन की पहचान कर उन्हें तुरंत बंद करा सकते हैं. यह ऐप पहचान चोरी, नकली KYC और बैंकिंग धोखाधड़ी जैसे जोखिमों से भी बचाव प्रदान करता है.
ऐप की सफलता के सरकारी आंकड़े
सरकारी डेटा के अनुसार, ऐप लॉन्च होने के बाद से अगस्त 2025 तक इसे 50 लाख से अधिक लोगों ने डाउनलोड किया. अब तक 37.28 लाख चोरी या गुम हुए मोबाइल ब्लॉक किए जा चुके हैं, जबकि 22.76 लाख डिवाइसों का लोकेशन ट्रैक किया गया है. अक्टूबर महीने में ही 50,000 से अधिक खोए फोन वापस मिले. सरकार का दावा है कि 30 मिलियन से अधिक फर्जी मोबाइल कनेक्शन इस ऐप की मदद से बंद किए गए.
देश के विशाल मोबाइल बाजार पर प्रभाव
भारत दुनिया के सबसे बड़े मोबाइल बाजारों में से एक है, जहां डेढ़ अरब से अधिक मोबाइल कनेक्शन सक्रिय हैं. ऐसे में इस ऐप का अनिवार्य होना उपभोक्ताओं की सुरक्षा को मजबूत करेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे चोरी और फर्जी डिवाइसों का अवैध बाजार काफी हद तक कमजोर होगा. मोबाइल कंपनियों को अब अपने सिस्टम में बड़े बदलाव करने होंगे ताकि ऐप स्थायी रूप से इंस्टॉल रहे.
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा
अब उपभोक्ताओं को अपने नए स्मार्टफोन में संचार साथी पहले से मिलेगा. किसी भी स्थिति में इसे हटाया नहीं जा सकेगा. फोन खो जाने पर इसकी मदद से तुरंत ब्लॉक अनुरोध किया जा सकेगा. ऐप हिंदी सहित 22 भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे देश के हर क्षेत्र के उपयोगकर्ता इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. सरकार को उम्मीद है कि यह कदम देश में साइबर अपराध के स्तर को उल्लेखनीय रूप से कम करेगा.