आखिर स्मार्टवॉच कैसे चेक करती है आपकी हार्ट रेट? यहां जानें हर सवाल का जवाब
कई लोगों के मन में सवाल आता है कि स्मार्टवॉच आखिर हार्ट रेट कैसे माप लेती है? चलिए जानते हैं आपके हर सवाल का जवाब.
नई दिल्ली: बीते कुछ सालों में स्मार्टवॉच की डिमांड बहुत बढ़ गई है. लोग इसे सिर्फ समय देखने के लिए नहीं बल्कि हेल्थ और फिटनेस ट्रैक करने के लिए खरीदते हैं. यह आपके कदम गिनती है, कितनी कैलोरी बर्न हो रही है, स्ट्रेस कितना है और नींद कैसी रही, ये सब बताती है. लेकिन ये रीडिंग हमेशा सौ फीसदी सही नहीं होतीं. स्मार्टवॉच से भी गलती हो सकती है.
इन सारी चीजों को ट्रैक करने में हार्ट रेट यानी दिल की धड़कन सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. स्मार्टवॉच आपकी रेस्टिंग हार्ट रेट को भी मॉनिटर करती है. इससे पता चलता है कि दिल की धड़कन में बदलाव हो रहा है या नहीं, स्ट्रेस बढ़ रहा है या एक्टिविटी लेवल कैसा है. रेस्टिंग हार्ट रेट से दिल की सेहत और फिटनेस के बारे में भी अंदाजा लगता है. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि स्मार्टवॉच आखिर हार्ट रेट कैसे माप लेती है? चलिए जानते हैं इसके बारे में.
स्मार्टवॉच हार्ट रेट कैसे मापती है?
अलग-अलग स्मार्टवॉच में हार्ट रेट मापने का तरीका थोड़ा अलग हो सकता है. ज्यादातर मॉडल PPG यानी फोटोप्लेथिस्मोग्राफी नाम का ऑप्टिकल हार्ट रेट मॉनिटर इस्तेमाल करते हैं. इसमें ग्रीन लाइट की मदद से देखा जाता है कि नसों में खून कितनी तेजी से बह रहा है. कुछ महंगे या प्रीमियम मॉडल में ECG यानी इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम सेंसर भी होता है. यह दिल के बिजली के संकेतों को मापकर हार्ट रेट बताता है.
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PPG सेंसर कैसे काम करता है?
PPG सबसे आम तरीका है. यह सेंसर खून की मात्रा में होने वाले बदलाव को चेक करता है. जब दिल धड़कता है तो शरीर की छोटी नसें (कैपिलरी) फैलती और सिकुड़ती हैं. खून आता-जाता रहता है. स्मार्टवॉच की पीठ पर लगा PPG सेंसर स्किन पर ग्रीन लाइट डालता है. फिर देखता है कि कितनी रोशनी वापस लौटकर आई. जब नस खून से भरी होती है तो वह ग्रीन लाइट को लगभग पूरी तरह एब्जॉर्ब कर लेती है. रोशनी कम आती है. जब नस खाली होती है तो रोशनी ज्यादा लौटती है. इस बदलाव को गिनकर स्मार्टवॉच हार्ट रेट बता देती है. यह तरीका आसान और सस्ता है, इसलिए ज्यादातर स्मार्टवॉच में यही लगा होता है.
ECG हार्ट रेट मॉनिटर क्या करता है?
ECG सेंसर प्रीमियम स्मार्टवॉच में ज्यादा मिलता है. यह हार्ट रेट को कंट्रोल करने वाले इलेक्ट्रिक साइन को मापता है. इसके लिए वॉच का सेंसर स्किन से अच्छे से टच होना जरूरी होता है. जब यह स्किन से कॉन्टैक्ट में रहता है तो यह बिजली के छोटे-छोटे बदलावों को पकड़कर हार्ट रेट और धड़कन का समय बताता है. ECG की खास बात यह है कि यह दिल की अनियमित धड़कन जैसी समस्या (जैसे एट्रियल फिब्रिलेशन) को भी पहचान सकता है. PPG में यह सुविधा आमतौर पर नहीं होती.
PPG और ECG में कौन बेहतर?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ECG ज्यादा सटीक होता है. PPG की रीडिंग पर कई चीजें असर डाल सकती हैं. जैसे हाथ पर टैटू हो, त्वचा का रंग गहरा हो या हाथ हिल रहा हो तो रीडिंग गलत आ सकती है. अगर आपको बहुत सटीक हार्ट रेट मॉनिटरिंग चाहिए तो ECG वाली स्मार्टवॉच चुनना बेहतर रहेगा.
PPG में ग्रीन लाइट क्यों इस्तेमाल होती है?
हमारे खून में हीमोग्लोबिन होता है. ऑक्सीजन मिलने पर यह लाल हो जाता है. रेड कलर ग्रीन लाइट को बहुत अच्छी तरह सोख लेता है. इसलिए जब नस खून से भरी होती है तो ग्रीन लाइट लगभग पूरी अब्जॉर्ब हो जाती है और वापस नहीं लौटती. जब खून कम होता है तो रोशनी लौट आती है. इसके अलावा ग्रीन लाइट स्किन के अंदर बहुत गहराई तक नहीं जाती. इसलिए स्मार्टवॉच सिर्फ सतह से ही सही रीडिंग ले पाती है. यही वजह है कि ग्रीन लाइट का इस्तेमाल किया जाता है.
स्मार्टवॉच की रीडिंग कितनी भरोसेमंद है?
स्मार्टवॉच रोजमर्रा की फिटनेस ट्रैकिंग के लिए काफी अच्छी हैं. स्टेप्स, कैलोरी, स्लिप और नॉर्मल हार्ट रेट के लिए मददगार हैं. लेकिन मेडिकल जांच की जगह नहीं ले सकतीं. अगर दिल से जुड़ी कोई गंभीर समस्या हो तो डॉक्टर से ही सलाह लें. रेस्टिंग हार्ट रेट नियमित रूप से चेक करते रहें. अगर अचानक बहुत बदलाव दिखे तो ध्यान देने की जरूरत है.
नोट: इसके लिए स्मार्टवॉच को सही तरह से पहनना जरूरी है. न ज्यादा टाइट और न ज्यादा लूज… सही से वॉच पहनने पर ही रीडिंग सही से रीड हो पाएगी.