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गूगल को पैसे कमाना पड़ा भारी, ऑनलाइन ऐड को गलत तरह से करता था कंट्रोल!

Google Monopoly Case: टेक जाइंट पर एक केस चल रहा है जिसमें गूगल अपने ऐड मैनेजर को खो सकता है. चलिए जानते हैं इस केस के बारे में.

Shilpa Shrivastava
गूगल को पैसे कमाना पड़ा भारी, ऑनलाइन ऐड को गलत तरह से करता था कंट्रोल!

Google Monopoly Case: गूगल के साथ कुछ सही नहीं चल रहा है, यह कहना गलत नहीं होगा. गूगल को एंड्रॉइड और क्रोम खोने का डर है जिसके बीच कंपनी जल्द ही एक प्लेटफॉर्म से हाथ धो सकती है. गूगल को Google Ad Manager खोना पड़ सकता है. यह फैसला एक अमेरिकी अदालत ने सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि गूगल ने ऑनलाइन एड मार्केट के कुछ प्रमुख हिस्सों को गलत तरह से कंट्रोल किया है. 

एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की डिस्ट्रिक्ट जज लियोनी ब्रिंकेमा ने कहा कि गूगल ने जानबूझकर ऑनलाइन विज्ञापन बाजार में एकाधिकार हासिल किया और उसे बनाए रखा है. जज के अनुसार, गूगल ने दो मुख्य चीजों पर कब्जा किया जिसमें पब्लिशर ऐड सर्वर हैं. इसमें वो टूल होते हैं जो वेबसाइट्स अपने एड को दिखाने और मैनेज करने के लिए इस्तेमाल करती है. वहीं, दूसरा ऐड एक्सचेंज है जिसमें ये एक डिजिटल मार्केट होता है जहां विज्ञापन खरीदने और बेचने वाले आपस में कनेक्ट करते हैं.

जज ब्रिंकेमा ने कहा कि गूगल ने जानबूझकर अपने मुकाबले वाले कंपनियों को बाहर कर दिया जिससे इसका नुकसान पब्लिशर कंपनियों, विज्ञापन बाजार और आम लोगों को भी हुआ. अगर सीधे शब्दों में समझा जाए तो गूगल ने ऐसे तरीके अपनाएं जिससे दूसरों को उससे बराबरी करने का मौका न मिले. 

ये हैं मामले के कुछ अहम प्वाइंट्स:

  • कोर्ट का यह फैसला एक और सुनवाई का रास्ता साफ करता है जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि गूगल को उन मार्केट्स में कॉम्पेटिशन बहाल करने के लिए क्या करना चाहिए, जिसे अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है. 

  • यह कोर्ट का दूसरा फैसला है कि गूगल के पास अवैध एकाधिकार है. इससे पहले ऑनलाइन सर्च के मामले में भी ऐसा ही फैसला आया था. 

  • न्याय विभाग ने कहा है कि गूगल को कम से कम अपना गूगल ऐड मैनेजर बेचना चाहिए, जिसमें कंपनी का पब्लिशर एडवरटाइजिंग सर्वर और विज्ञापन एक्सचेंज शामिल है. 

  • गूगल ने पहले भी यूरोपीय एंटीट्रस्ट विनियामकों को खुश करने के लिए अपना विज्ञापन एक्सचेंज बेचने पर विचार किया है.