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'भविष्य में फोन नहीं, सिर्फ AI होगा...', पॉडकास्ट में एलन मस्क ने की भविष्यवाणी; जानें कैसा होगा डिवाइस

एलन मस्क ने कहा है कि भविष्य में पारंपरिक फोन नहीं रहेंगे. उनकी जगह AI-संचालित डिवाइस होंगे जो रीयल-टाइम में सर्वर से जुड़कर वीडियो, ऑडियो और डेटा तैयार करेंगे. मस्क का मानना है कि भविष्य में न ऑपरेटिंग सिस्टम होंगे और न ऐप्स, सिर्फ AI इंटरफेस होगा.

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Km Jaya

नई दिल्ली: टेक दुनिया के दिग्गज एलन मस्क ने एक बार फिर भविष्य की तकनीक पर अपनी सोच से सबको चौंका दिया है. 'जो रोगन एक्सपीरियंस' पॉडकास्ट में मस्क ने कहा कि वह किसी नए फोन पर काम नहीं कर रहे हैं, लेकिन उनका मानना है कि आने वाले समय में पारंपरिक अर्थों में 'फोन' जैसी कोई चीज नहीं बचेगी. मस्क के अनुसार, भविष्य के डिवाइस सिर्फ AI इंफरेंस एज नोड्स होंगे, जो सर्वर-साइड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सीधे जुड़कर काम करेंगे.

एलन मस्क ने कहा कि आने वाले समय में हमारे डिवाइस केवल रेडियो कनेक्शन के जरिए AI सिस्टम से संवाद करेंगे. उन्होंने कहा, 'जिसे हम अभी फोन कहते हैं, वह दरअसल AI से बात करने वाला एज नोड बन जाएगा. यह रीयल-टाइम में आपकी किसी भी जरूरत का वीडियो, ऑडियो या विजुअल आउटपुट तैयार करेगा.' मस्क के मुताबिक, ऐसे डिवाइस में न कोई पारंपरिक ऑपरेटिंग सिस्टम होगा और न ही ऐप्स की जरूरत पड़ेगी.'

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आने वाले समय में क्या होगा?

इस भविष्य की कल्पना में, डिवाइस केवल एक स्क्रीन और ऑडियो आउटपुट टूल होगा, जो रीयल-टाइम में सर्वर-साइड AI से जानकारी प्राप्त करेगा. मस्क ने यह भी इशारा दिया कि आने वाले वर्षों में इंसानों और AI के बीच की दूरी लगभग समाप्त हो जाएगी, क्योंकि ज्यादातर कार्य सीधे AI-संचालित डिवाइस के जरिए पूरे होंगे.

कैसे बदल जाएगा बात करने का तरीका?

उन्होंने कहा कि फोन की अवधारणा वैसे ही पुरानी पड़ जाएगी जैसे आज टेलीग्राफ या पेजर हो गए हैं. मस्क के मुताबिक, AI के साथ संवाद करने का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा. यह ठीक वैसे ही होगा जैसे किसी इंसान से बात करना. एलन मस्क की यह भविष्यवाणी उनकी AI कंपनी xAI और न्यूरालिंक प्रोजेक्ट्स से भी जुड़ी मानी जा रही है. 

टेक विशेषज्ञों ने इसपर क्या कहा?

विशेषज्ञों का मानना है कि मस्क जिस 'AI एज नोड' की बात कर रहे हैं, वह न्यूरालिंक और क्लाउड-बेस्ड AI का संयोजन हो सकता है. इससे यह संभव होगा कि हर डिवाइस खुद एक मिनी-AI हब की तरह काम करे. यह तकनीक डेटा प्राइवेसी, सर्वर सुरक्षा और AI नियमन के लिहाज से बड़ी चुनौतियां पैदा कर सकती है. भविष्य में अगर सबकुछ AI सर्वर पर निर्भर होगा, तो इंटरनेट एक्सेस और साइबरसिक्योरिटी की भूमिका बेहद अहम हो जाएगी.