Elon Musk की Neuralink का कमाल! बोल नहीं सकता था शख्स, दिमाग से कंप्यूटर ने कहा- ‘I Love You’
Elon Musk की Neuralink ने एक ऐसे मरीज का वीडियो साझा किया है, जो बोल नहीं सकता. ब्रेन इम्प्लांट की मदद से उसने कंप्यूटर की आवाज के जरिए सामने बैठे व्यक्ति से ‘I Love You’ कहा.
Elon Musk की Neuralink एक बार फिर ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस को लेकर चर्चा में है. कंपनी की 0.23 सेकंड की क्लिप में एक मरीज दिमाग के संकेतों से कंप्यूटर आवाज के जरिए संवाद करता दिखता है. वीडियो में उसका पहला संदेश ‘I Love You’ सुनाई देता है, जिसके बाद दोनों भावुक नजर आते हैं.
बोल नहीं सकता था, फिर भी दिमाग ने कहा ‘I Love You’
Neuralink ने इस वीडियो को ‘A Beautiful Surprise’ नाम दिया है. इसमें मरीज बोलने की कोशिश करता दिखाई देता है और उसके दिमाग में बनने वाले शब्दों को BCI सिस्टम पहचानकर आवाज में बदलता है. सबसे पहले कंप्यूटर से ‘I Love You’ सुनाई देता है. सामने मौजूद व्यक्ति के लिए यह पल भावुक बन जाता है और दोनों गले मिलते नजर आते हैं. यह प्रदर्शन बताता है कि ऐसी तकनीक आगे सफल होती है तो बोलने में परेशानी वाले लोगों के लिए संवाद का नया तरीका बन सकता है.
मरीज की पहचान अब भी रखी गई गुप्त
वीडियो में दिखाई देने वाले मरीज की पहचान और उसकी बीमारी से जुड़ी पूरी जानकारी Neuralink ने सार्वजनिक नहीं की है. कंपनी ने मुख्य रूप से यह दिखाया कि उसका ब्रेन इम्प्लांट दिमाग के संकेतों को कंप्यूटर से पैदा हुई आवाज में बदलने में कैसे मदद कर सकता है. हालांकि, Neuralink ने यह भी साफ किया है कि एक मरीज में दिखा नतीजा जरूरी नहीं कि दूसरे प्रतिभागियों या आगे होने वाले सभी परीक्षणों में भी वैसा ही मिले. इसलिए इसे अभी शुरुआती तकनीकी प्रदर्शन के तौर पर देखना जरूरी है.
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पहले भी विचारों से कंप्यूटर चलाने का दिखा चुकी है डेमो
Neuralink इससे पहले भी अपने ब्रेन इम्प्लांट की क्षमता दिखा चुकी है. कंपनी ने ऐसे मरीजों के वीडियो साझा किए हैं, जिन्होंने सिर्फ दिमाग के संकेतों से कंप्यूटर का कर्सर चलाया. मार्च में ब्रिटिश सेना के पूर्व सैनिक Jon L. Noble का वीडियो भी सामने आया था. गंभीर रीढ़ की चोट के बाद गर्दन के नीचे लकवाग्रस्त Noble ने N1 चिप की मदद से विचारों के जरिए MacBook का कर्सर नियंत्रित किया. भविष्य में यही तकनीक संवाद और दूसरी जरूरतों में मदद कर सकती है लेकिन इसके लिए अभी ज्यादा क्लिनिकल ट्रायल और वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी हैं.