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'आपके नंबर से हो रहा गलत काम...', 48 घंटे में लूटे 1.29 करोड़; नकली कोर्ट दिखाकर रिटायर्ड बैंक मैनेजर से ठगे करोड़ों

ग्रेटर नोएडा में एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर को 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर ठगों ने 1.29 करोड़ रुपये ठग लिए. यह मामला साइबर फ्रॉड के बढ़ते खतरे को दिखाता है.

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Babli Rautela

भारत में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और अब ठग नए नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. हाल ही में ग्रेटर नोएडा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर को 48 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 1.29 करोड़ रुपये ठग लिए गए हैं. ठगों ने खुद को TRAI अधिकारी बताकर पीड़ित से संपर्क किया. उन्होंने दावा किया कि पीड़ित के नाम पर जारी एक सिम कार्ड का इस्तेमाल गैर कानूनी गतिविधियों में हो रहा है. इस आरोप के बाद उन्होंने पीड़ित को डराया कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

ठगों ने अपनी बात को सच साबित करने के लिए वीडियो कॉल का सहारा लिया. उन्होंने एक नकली कोर्टरूम सेटअप दिखाया, जिससे पीड़ित को यकीन हो गया कि मामला गंभीर है. यहीं से शुरू हुआ डिजिटल अरेस्ट का असली खेल.

दबाव में रखा 48 घंटे तक

ठगों ने पीड़ित को लगातार 48 घंटे तक मानसिक दबाव में रखा. उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है और उन्हें हर निर्देश का पालन करना होगा. इस दौरान उन्होंने पीड़ित से उनकी निजी जानकारी भी हासिल की और धीरे धीरे बड़ी रकम ट्रांसफर करवा ली. आखिरकार ठगों ने पीड़ित से 1.29 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए. जब पीड़ित को एहसास हुआ कि उनके साथ धोखा हुआ है, तो उन्होंने तुरंत साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम?

डिजिटल अरेस्ट एक नया साइबर फ्रॉड तरीका है, जिसमें ठग खुद को पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं. वे झूठे आरोप लगाकर कहते हैं कि पीड़ित को ऑनलाइन ही गिरफ्तार किया जा सकता है. इसके बाद वे लगातार कॉल या वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित को दबाव में रखते हैं और पैसे ऐंठ लेते हैं.

इस साल ऐसे कई बड़े मामले सामने आए हैं. इससे पहले देहरादून में एक बुजुर्ग महिला से 3.09 करोड़ रुपये ठगे गए. वहीं दिल्ली में एक NRI डॉक्टर दंपति से 14.85 करोड़ रुपये की ठगी हुई. इन मामलों से साफ है कि ठग खासकर बुजुर्ग लोगों को निशाना बना रहे हैं.