Are You Dead? हर 48 घंटे में आपसे पूछा जाएगा ये सवाल, जानें क्या है वजह
Are You Dead ऐप के साथ आप अपने लिए एक सुरक्षा का माहौल तैयार कर सकते हैं. यह ऐप यूजर हर 48 घंटे में पूछती है Are You Dead, अगर यूजर जवाब नहीं देते हैं तो उनके करीबियों को जानकारी शेयर कर दी जाती है.
नई दिल्ली: एक ऐसी ऐप तेजी से वायरल हो रही है, जो हर 48 घंटे में आपसे पूछ रही है- Are You Dead? यह अजीब-सी ऐप पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच रही है. बता दें कि इस ऐप का नाम ही आर यू डेड है. यह ऐप हर 48 घंटे में, यूजर्स को एक मैसेज भेजकर पूछती है कि वो जिंदा हैं या नहीं. अगर यूजर कोई जवाब नहीं देता है तो यह ऐप यूजर द्वारा चुने गए व्यक्ति, जैसे दोस्त या परिवार के सदस्य को अलर्ट करता है.
अब सबसे बड़ा सवाल है कि यह ऐप काम कैसे करती है. इस ऐप को इस्तेमाल करना काफी आसान है. जैसे ही आप इस ऐप को डाउनलोड कर लेते हैं तो यूजर किसी ऐसे व्यक्ति की कॉन्टैक्ट डिटेल्स डालते हैं जिस पर वो भरोसा करते हैं. फिर हर दो दिन में यूजर के पास ऐप से एक नोटिफिकेशन ऐती है, जिसमें पूछा जाता है Are You Dead? इसमें उन्हें यह दिखाने के लिए एक बटन टैप करने के लिए कहा जाता है कि वे ठीक हैं.
बटन पर टैप न करने से क्या होगा?
अगर यूजर तय समय के अंदर जवाब नहीं देते हैं तो ऐप इमरजेंसी कॉन्टैक्ट को एक मैसेज भेज देता है. इससे पता चल जाता है कि कुछ गड़बड़ है. बता दें कि यह एक पेड ऐप है लेकिन यह काफी किफायती है. अपने बेसिक डिजाइन के बावजूद, यह एक लोकप्रिय ऐप है, जो उन लोगों के लिए सही रहेगा, जो बड़े शहरों में अकेले रहते हैं.
क्यों इस ऐप का इस्तेमाल करना है सही?
कुछ लोग इस ऐप का नाम सुनकर हंस रहे हैं लेकिन इस ऐप के पीछे की वजह काफी गंभीर है. जो लोग अलग या अकेले रहते हैं और उनका किसी के साथ या अपने आस-पास वालों के साथ कोई लेना-देना नहीं होता है, उनके लिए यह ऐप काफी अच्छी है. यह ऐप यूजर्स को सुरक्षा का एहसास देती है. प्रोफेशनल्स, बुजुर्गों, या अकेले रहने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए, यह एक डिजिटल चेक-इन सिस्टम की तरह काम करता है. यह जानना कि अगर वे जवाब नहीं देंगे तो किसी को अलर्ट किया जाएगा.
यह ऐप लोगों के अकेलेपन में उन्हें सुरक्षा का एहसास दिलाती है. जिस तरह से बड़े शहर में लाइफस्टाइल बदल रही है और लोग इंडिपेंडेट हो रहे हैं, यह ऐप उनके काफी काम आ सकती है. शुरुआत में यह ऐप अजीब लग सकती है, लेकिन इसने इस बारे में एक जरूरी बातचीत शुरू की है कि टेक्नोलॉजी लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में सुरक्षित और ज्यादा जुड़ा हुआ महसूस कराने में कैसे मदद कर सकती है.