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Fake Parcel Scam: FD तोड़कर गवाएं 1.8 करोड़ रुपये, एक झटके में जमा-पूंजी हो गई गायब

Fake Parcel Scam: फेक पार्सल स्कैम के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं. एक व्यक्ति के साथ 1.8 करोड़ रुपये का फ्रॉड हुआ है. स्कैमर्स ने व्यक्ति को कहा कि उसके नाम पर 150 ग्राम MDMA, 4 किलो कपड़े, एक लैपटॉप और 20 नकली पासपोर्ट का पार्सल है जिसे कस्टम डिपार्टमेंट ने जब्त कर लिया है. इस मामले में आगे क्या हुआ, चलिए जानते हैं.

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India Daily Live

Fake Parcel Scam: फेक पार्सल स्कैम का एक नया मामला सामने आ गया है. दक्षिण मुंबई के एक 76 वर्षीय के रिटायर्ड व्यक्ति ऑनलाइन स्कैम के शिकार हो गए. इसमें उन्हें 1.8 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इसमें कूरियर कंपनी और कस्टम डिपार्टमेंट के नाम से स्कैम किया गया है. इन्होंने व्यक्ति को एक अवैध पार्सल के बारे में बताया और उसे धमकाया. फिर उनके पैसे ठग लिए. 

एक रिपोर्ट के अनुसार, यह घोटाला 19 मार्च को हुआ जब व्यक्ति को एक कूरियर कंपनी से एक व्यक्ति का कॉल आया. कॉल करने वाले ने व्यक्ति को बताया कि उसके नाम पर एक पार्सल है जो म्यांमार से भेजा गया है और उसे कस्टम डिपार्टमेंट ने जब्त कर लिया है. उन्होंने कहा कि पार्सल में 150 ग्राम MDMA, 4 किलो कपड़े, एक लैपटॉप और 20 नकली पासपोर्ट थे. व्यक्ति ने कहा कि ये उसका पार्सल नहीं है. 

हैकर्स ने उठाया डर का फायदा: 

फिर व्यक्ति के डर का फायदा उठाते हुए, कॉल करने वाले ने दावा किया कि पार्सल व्यक्ति के आधार कार्ड का इस्तेमाल करके भेजा गया था. ऐसे में वो अवैध एक्टिविटी में फंस सकता है और उस पर FIR भी हो सकती है. पहले तो व्यक्ति ने किसी भी तरह का पेमेंट करने से मना कर दिया. फिर स्कैमर्स ने उसे फिर से कॉल किया और इस बार उसे लखनऊ के आलमबाग पुलिस स्टेशन से कॉल आया है. उसे कहा गया कि कॉल करने वाला व्यक्ति पुलिस अधिकारी है. स्कैमर ने कहा कि यह साइबर क्राइम का बड़ा मामला है. 

साइबर पुलिस अधिकारी ने कॉल को एक व्यक्ति के पास ट्रांसफर किया जिसने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया. फिर व्यक्ति को टेलीग्राम के जरिए बात करने के निर्देश दिए. इस ऐप पर कनेक्ट करने के बाद व्यक्ति से उसका से बैंक स्टेटमेंट मांगा गया. डिटेल्स न देने पर उसे जेल में डालने की धमकी दी गई. 

आखिरी में लगातार कॉल और स्थिति से घबराकर व्यक्ति ने 21 मार्च से 22 अप्रैल, 2024 के बीच अपने फिक्स्ड डिपॉजिट से 1.8 करोड़ रुपये फर्जी सीबीआई अधिकारी के अकाउंट में भेज दिए. एक बार जब फंड ट्रांसफर हो गया, तो टेलीग्राम ग्रुप डिलीट कर दिया गया और फिर उस व्यक्ति को एहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है.