Uttarkashi Cloudburst: धराली-हर्षिल में मलबे में दबे लोगों को निकालने पर फोकस, सेना ले रही है ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार की मदद
हर्षिल घाटी और धराली गांव में 5 अगस्त को बादल फटने के बाद आई भयानक बाढ़ में कई घर बह गए थे. इसके अलावा कई लोग इस सैलाब में बह गए जिन्हें खोजने के लिए लगातार अभियान जारी है.
Uttarkashi Cloudburst: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली-हर्षिल क्षेत्र में बादल फटने की घटना के बाद चल रहे राहत और बचाव कार्यों में सेना, राज्य सरकार और अन्य एजेंसियां पूरी ताकत से जुटी हुई हैं. इस आपदा ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है, प्रभावित लोगों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं. ब्रिगेडियर एम.एस. ढिल्लन ने इस अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी दी.
लगातार जारी है बचाव अभियान
ब्रिगेडियर ढिल्लन ने बताया, "5 अगस्त से सेना, राज्य सरकार और अन्य एजेंसियां निरंतर राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं. आज हमारा पूरा ध्यान उन लोगों को खोजने पर है, जो बादल फटने के बाद मलबे में दब गए हैं." उन्होंने कहा कि इस अभियान में आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोगों की जान बचाई जा सके. धराली आपदाग्रस्त क्षेत्रों से प्रभावित लोगों को निकालने और वहां जरूरी राहत सामग्री भेजने का कार्य निरंतर चल रहा है.
यह तकनीक मलबे में फंसे लोगों को खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जिससे बचाव कार्य में तेजी आई है. उन्होंने बताया कि संचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सेना ने क्षेत्र में सैटेलाइट संचार की व्यवस्था भी की है. ब्रिगेडियर ढिल्लन ने बताया, "हमने सैटेलाइट संचार स्थापित किया है ताकि राहत कार्यों में समन्वय बना रहे."