विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनेगा उत्तराखंड, संत सम्मेलन में बोले सीएम धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संत सम्मेलन में कहा कि संत समाज राष्ट्र चेतना का आधार है. उन्होंने उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने का संकल्प दोहराते हुए सांस्कृतिक संरक्षण और विकास पर जोर दिया.
हरि सेवा आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ और विशाल संत सम्मेलन के दौरान उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संत-महात्माओं का अभिनंदन किया. उन्होंने आश्रम द्वारा समाज सेवा, संस्कार निर्माण और जनजागरण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करना समय की आवश्यकता है. उन्होंने संत समाज की भूमिका को राष्ट्र निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए राज्य के भविष्य को लेकर अपनी प्राथमिकताएं भी साझा कीं.
संत समाज की भूमिका पर जोर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह लोगों को जीवन के मूल उद्देश्यों, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने का सशक्त माध्यम है. उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखने में संतों और मनीषियों का योगदान सदैव अग्रणी रहा है. समाज को दिशा देने से लेकर कठिन समय में लोगों का मार्गदर्शन करने तक संत समाज ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी संत समाज सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है.
सांस्कृतिक पुनर्जागरण की चर्चा
धामी ने कहा कि देश वर्तमान समय में सांस्कृतिक पुनर्जागरण के दौर से गुजर रहा है. उन्होंने बताया कि देशभर में धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण तथा विकास के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं. उनके अनुसार, ऐसे प्रयासों से भारत की प्राचीन पहचान को नई ऊर्जा मिली है. मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड भी अपनी आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है. उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में राज्य धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा.
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आध्यात्मिक राजधानी बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है. उन्होंने बताया कि देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और सनातन परंपराओं की रक्षा सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है. इसी उद्देश्य से विभिन्न नीतिगत फैसले लागू किए गए हैं. उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत करने और सांस्कृतिक मूल्यों को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार का प्रयास है कि विकास और परंपरा दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए.
युवाओं को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, दर्शन और परंपराओं से जोड़ना बेहद आवश्यक है. इसी सोच के तहत दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज की स्थापना की गई है, जहां भारतीय ज्ञान परंपरा पर अध्ययन और शोध को बढ़ावा दिया जाएगा. साथ ही हरिद्वार में प्राच्य शोध संस्थान स्थापित करने की दिशा में भी कार्य चल रहा है. कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने स्वामी हरिचेतानन्द जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए संत समाज से राज्य और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर मार्गदर्शन और आशीर्वाद देने का आग्रह किया.