PoK में पाकिस्तान के खिलाफ उबाल, बच्चों और महिलाओं ने संभाला मोर्चा; अब तक 58 की मौत

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में जारी विरोध प्रदर्शन 14वें दिन भी जारी रहे. आंदोलन में अब महिलाएं और स्कूली बच्चे भी शामिल हो गए हैं. प्रदर्शनकारी अधिकारों की बहाली और अपनी मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चल रहा जनआंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. सोमवार को आंदोलन ने नया स्वरूप तब लिया जब बड़ी संख्या में महिलाएं और स्कूली बच्चे भी सड़कों पर उतर आए. रावलकोट सहित कई इलाकों में लोगों ने रैलियां और धरने आयोजित कर अपनी मांगों को दोहराया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं, नागरिक अधिकारों और बेहतर जीवन स्थितियों की मांग कर रहे हैं. आंदोलन अब पूरे क्षेत्र में व्यापक जनसमर्थन हासिल करता दिखाई दे रहा है.

रावलकोट के ईदगाह मैदान में विरोध प्रदर्शन का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. यहां हजारों लोग लगातार धरने पर बैठे हैं. सोमवार को स्कूली बच्चों ने भी रैली में हिस्सा लिया और विभिन्न मांगों से जुड़े पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया. बच्चों ने शिक्षा, इंटरनेट सेवा और बुनियादी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया.

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

सुधनोती जिले और अन्य क्षेत्रों में महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में मार्च निकाला. मंडहोल समेत कई इलाकों में महिलाओं ने रैलियां निकालकर अपनी आवाज बुलंद की. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आम लोगों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए.


23 जून की समय सीमा अहम

इन प्रदर्शनों का नेतृत्व अवामी एक्शन कमिटी कर रही है. संगठन ने प्रशासन के समक्ष 38 मांगों का चार्टर रखा है और उन्हें स्वीकार करने के लिए 23 जून तक का समय दिया है. कमिटी ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो बड़े स्तर पर मार्च आयोजित किया जाएगा.

बढ़ रही मानवीय चुनौतियां

स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं के अनुसार, क्षेत्र में इंटरनेट सेवाएं लंबे समय से प्रभावित हैं. साथ ही आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भी दिक्कतें सामने आ रही हैं. कई इलाकों में लोगों ने खाद्य सामग्री की कमी और संचार सेवाओं में बाधा को लेकर चिंता जताई है. इन परिस्थितियों ने आंदोलन को और व्यापक बना दिया है.

तनावपूर्ण बनी हुई स्थिति

प्रदर्शन शुरू होने के बाद से कई स्थानों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आई हैं. हालात को देखते हुए पूरे क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है. अब सबकी निगाहें 23 जून पर टिकी हैं, जब आंदोलन के भविष्य और प्रशासन की प्रतिक्रिया की दिशा तय हो सकती है.