उत्तराखंड में बारिश का दौर जारी, 6 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट

उत्तराखंड में पिछले पांच दिनों से रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है. मौसम विभाग ने आज प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज और बौछारों का अनुमान जताया है.

ANI
Shanu Sharma

मौसम विभाग के अनुसार आज यानी 4 सितंबर को नैनीताल, चंपावत, देहरादून, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है. इसके अलावा प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है.

मौसम विभाग की ओर से लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. बारिश के तेज से अति तेज दौर के साथ आकाशीय बिजली चमकने की भी आशंका जताई गई है.

भूस्खलन से बद्रीनाथ हाईवे हुआ बाधित

बारिश के कारण चमोली में भूस्खलन की घटना भी सामने आई. पार्थाडीप के पास मलबा और पेड़ गिरने से बद्रीनाथ जाने वाला मार्ग कुछ समय के लिए बंद हो गया. इससे बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा. हालांकि, मलबा हटाने के बाद मार्ग को दोबारा खोल दिया गया. पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश को देखते हुए ऐसे रास्तों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत बनी हुई है.


रुद्रप्रयाग में लगातार बारिश के बीच अलकनंदा नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है. नदी का पानी चेतावनी स्तर के करीब पहुंच गया है. प्रशासन और संबंधित विभाग नदी-नालों के जलस्तर पर लगातार नजर रख रहे हैं. प्रदेश में 7 सितंबर तक बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है. ऐसे में अगले कुछ दिन भी उत्तराखंड के लिए मौसम के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं.

अगले तीन दिनों तक मौसम का हाल 

  • 5 सितंबर को देहरादून, हरिद्वार और पौड़ी में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है. प्रदेश के सभी जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली और तेज से अति तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है.
  • 6 सितंबर को बागेश्वर, नैनीताल और चमोली में कुछ स्थानों पर भारी बारिश का यलो अलर्ट है. वहीं पूरे प्रदेश में गरज-चमक और आकाशीय बिजली के साथ तेज बारिश की संभावना जताई गई है.
  • 7 सितंबर को बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है. इसके अलावा सभी जिलों में गरज-चमक के साथ तेज से अति तेज बारिश का दौर आने की आशंका है. मौसम विभाग के लगातार अलर्ट को देखते हुए पहाड़ी मार्गों और नदी-नालों के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी होगा.