उत्तराखंड में शिक्षकों के ट्रांसफर पर बड़ा झटका! दोबारा आवेदन करने वालों की छुट्टी, 1 हफ्ते में मांगी गई लिस्ट

उत्तराखंड प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने धारा-27 के तहत तबादला आवेदनों की जांच के निर्देश दिए हैं. जिला शिक्षा अधिकारियों को एक सप्ताह में पदवार और संवर्गवार सूची हार्ड कॉपी तथा सॉफ्ट कॉपी में भेजनी होगी.

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Kuldeep Sharma

उत्तराखंड में सरकारी शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादलों को लेकर शिक्षा विभाग ने प्रक्रिया सख्त कर दी है. निदेशालय ने धारा-27 के तहत मिले आवेदनों की बारीकी से जांच कराने के निर्देश दिए हैं. खास तौर पर पहले तबादला पा चुके कर्मचारियों के दोबारा आवेदन को लेकर स्पष्ट नियम तय किए गए हैं.

दोबारा तबादले के लिए आवेदन पर रोक

शिक्षा निदेशालय, देहरादून ने साफ किया है कि जिन शिक्षकों या कर्मचारियों का पहले ही धारा 17(1)(ख) में बताए गए आधारों के तहत तबादला हो चुका है, उनके नए आवेदन को फिर से सूची में शामिल नहीं किया जाएगा. विभाग ने अधिकारियों को आवेदन प्राप्त करते समय ही इस पहलू की जांच करने को कहा है.

यानी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ही ऐसे मामलों को अलग कर दिया जाएगा. इसका सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिन्होंने पहले स्थानांतरण का लाभ लेने के बाद दोबारा धारा-27 के तहत आवेदन किया है. विभाग का मकसद नियमों के दायरे में रहकर ही तबादलों की प्रक्रिया आगे बढ़ाना है.


पद और संवर्ग के हिसाब से बनेगी सूची

निदेशालय ने आवेदनों को व्यवस्थित तरीके से छांटने के लिए पदवार और संवर्गवार सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं. जिला स्तर पर प्राप्त आवेदनों को जनपद और अंतरजनपदीय श्रेणी के आधार पर अलग किया जाएगा. इसके बाद केवल उन्हीं प्रकरणों को आगे भेजा जाएगा, जो वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत पात्र पाए जाएंगे.

संवर्ग परिवर्तन से जुड़े मामलों में भी अधिकारियों को 19 दिसंबर 2025 के शासनादेश संख्या 35662 के प्रावधानों का पालन करना होगा. संबंधित आवेदन के साथ धारा 17(2)(ड़) के अनुसार सक्षम अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र भी जरूरी होगा.

जांच की जिम्मेदारी अधिकारियों पर तय

तबादला आवेदनों की जांच की जिम्मेदारी भी अलग-अलग स्तर पर तय की गई है. विकासखंड स्तर पर मिलने वाले आवेदनों की प्राथमिक जांच उप शिक्षा अधिकारी करेंगे. इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा पूरे प्रकरण की दोबारा समीक्षा करेंगे.

उन्हें सभी आवेदनों की जांच पूरी होने के बाद संकलित सूची के साथ यह प्रमाणित करना होगा कि प्रक्रिया नियमों के मुताबिक पूरी की गई है. इस व्यवस्था से आवेदन की जांच में किसी तरह की कमी या अनियमितता की गुंजाइश कम करने की कोशिश की गई है. विभाग ने अधिकारियों को इस काम में विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं.

एक सप्ताह में भेजनी होगी पूरी रिपोर्ट

शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को रिपोर्ट तैयार करने के लिए केवल एक सप्ताह का समय दिया गया है. जांच पूरी करने के बाद आवेदनों की हार्ड कॉपी के साथ सॉफ्ट कॉपी भी निदेशालय को भेजनी होगी. विभाग का यह कदम तबादला प्रक्रिया में नियमों के पालन और पारदर्शिता पर जोर देने के तौर पर देखा जा रहा है.

सरकारी स्कूलों में स्थानांतरण को लेकर समय-समय पर नियमों की अनदेखी और गड़बड़ी की शिकायतें सामने आती रही हैं. ऐसे में धारा-27 के मामलों की शुरुआती स्तर पर सख्त छंटनी से अपात्र आवेदनों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की गई है.