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उत्तराखंड: पांच जिलों के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील की सख्त जांच, मदरसों में फर्जी नामांकन का मामला

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा महानिदेशालय और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि वास्तविक छात्रों की संख्या पता की जाए और मिड डे मील का राशन सही बच्चों को ही मिले. पिछले दिनों हरिद्वार जिले में जिला प्रशासन ने कई मदरसों की जांच की थी. जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ.

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Edited By: Antima Pal
उत्तराखंड: पांच जिलों के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील की सख्त जांच, मदरसों में फर्जी नामांकन का मामला
Courtesy: Pinterest

उत्तराखंड: सरकारी योजनाओं का पैसा सही बच्चों तक पहुंचे, इसके लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है. हरिद्वार के मदरसों में बड़े पैमाने पर फर्जी नामांकन सामने आने के बाद अब पांच जिलों के सरकारी स्कूलों और मदरसों में मिड डे मील तथा छात्र संख्या की जांच की जाएगी.

पांच जिलों के सरकारी स्कूलों में मिड डे मील की सख्त जांच

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने शिक्षा महानिदेशालय और सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि वास्तविक छात्रों की संख्या पता की जाए और मिड डे मील का राशन सही बच्चों को ही मिले. पिछले दिनों हरिद्वार जिले में जिला प्रशासन ने कई मदरसों की जांच की थी. जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ.

मदरसों में फर्जी नामांकन का मामला

मार्च 2026 में मदरसों के रिकॉर्ड में 31,780 बच्चों का नामांकन दर्ज था, जो अप्रैल में जांच के बाद घटकर सिर्फ 19,491 रह गया. यानी 12,289 फर्जी नामांकन मिले. इन फर्जी नामांकनों पर मिली सरकारी राशि की वसूली की जाएगी. इस मामले के बाद शिक्षा विभाग ने मैदानी क्षेत्रों पर खास नजर रखने का फैसला किया है. ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून जिले के अलावा पौड़ी के कोटद्वार, नैनीताल जिले के हल्द्वानी और रामनगर क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में जांच होगी.

जांच टीम में महानिदेशालय के अधिकारी, पीएम पोषण कार्यालय के कर्मचारी और संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी शामिल होंगे. टीम स्कूलों में जाकर देखेगी कि असल में कितने बच्चे नियमित रूप से आते हैं और कितना मिड डे मील तैयार किया जा रहा है. अगर फर्जी नामांकन या ज्यादा राशन बनाने की बात सामने आई तो कार्रवाई होगी. 

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मिड डे मील योजना का मकसद गरीब और जरूरतमंद बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है. अगर इसमें गड़बड़ी हुई तो योजना का उद्देश्य ही पूरा नहीं होगा. इसलिए पूरे प्रदेश में पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठाया गया है. राज्य में फिलहाल 5,57,199 बच्चों को मिड डे मील योजना का लाभ मिल रहा है.