निर्दलीय विधायक उमेश कुमार का इस्तीफे का ऐलान, 28 अक्टूबर को उठाएंगे बड़ा कदम

उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने 28 अक्टूबर को गैरसैंण विधानसभा में विधायक पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है.

India Daily 24x7
Shilpa Srivastava

गैरसैंण: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. खानपुर विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने 28 अक्टूबर को गैरसैंण विधानसभा में विधायक पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है. उमेश कुमार ने सरकार के साथ-साथ विपक्ष पर भी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है, वहीं विपक्ष ने भी उनका साथ देने के बजाय उन्हें बार-बार निराश किया है. उमेश कुमार ने साफ कर दिया है कि वह न तो बीजेपी में जाएंगे और न ही कांग्रेस में शामिल होंगे. ऐसे में उनके इस्तीफे के ऐलान ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है.

किसानों के मुद्दों पर सरकार को घेरा:

गैरसैंण में मीडिया से बातचीत के दौरान निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने किसानों से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया. उनका कहना है कि किसानों की समस्याओं और उनके बकाया भुगतान को लेकर लगातार आवाज उठाने के बावजूद समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है. उमेश कुमार ने इकबालपुर शुगर मिल पर वर्ष 2018 से किसानों का करीब 120 करोड़ रुपये बकाया होने का दावा भी किया. उन्होंने कहा कि किसानों के हितों से जुड़े इन मामलों का समाधान नहीं हो पाना चिंता का विषय है.

विपक्ष से भी जताई नाराजगी:

उमेश कुमार ने केवल सरकार ही नहीं, बल्कि विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि वह कई मौकों पर विपक्ष के साथ खड़े रहे, लेकिन उन्हें बार-बार निराशा और धोखे का सामना करना पड़ा. उमेश कुमार ने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में वह न तो बीजेपी में शामिल होंगे और न ही कांग्रेस का दामन थामेंगे. उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में उनके भविष्य के कदम को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं


28 अक्टूबर पर टिकी निगाहें:

अब सभी की निगाहें 28 अक्टूबर पर टिकी हैं, जब उमेश कुमार ने गैरसैंण विधानसभा में विधायक पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है. हालांकि, उनके इस ऐलान के बाद आगे क्या राजनीतिक घटनाक्रम सामने आता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा. फिलहाल, किसानों के बकाया भुगतान और उनकी समस्याओं को लेकर उठाए गए सवालों ने एक बार फिर सरकार की जवाबदेही और विपक्ष की भूमिका को चर्चा के केंद्र में ला दिया है.