रुद्रप्रयाग: गुरुद्वारा विवाद को पुलिस ने संयम से सुलझाया, आपत्तिजनक टिप्पणियों पर बोले DGP- होगी सख्त कार्रवाई
रुद्रप्रयाग के नागरासू गुरुद्वारे में चार दिन तक चले गतिरोध के बाद उत्तराखंड पुलिस ने स्थिति सामान्य कर दी है. डीजीपी दीपम सेठ ने आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वालों पर सख्त कार्रवाई और तीर्थयात्रियों से स्थानीय परंपराओं के सम्मान की अपील की.
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नागरासू स्थित गुरुद्वारे में कई दिनों तक चले गतिरोध के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली है. चार दिन तक बनी तनावपूर्ण स्थिति को पुलिस और प्रशासन ने धैर्य एवं संवाद के जरिए नियंत्रित किया. मामले के शांत होने के बाद अब उत्तराखंड पुलिस के महानिदेशक दीपम सेठ ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी टिप्पणी या अभद्र भाषा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने सभी तीर्थयात्रियों से स्थानीय परंपराओं के सम्मान की भी अपील की.
चार दिन तक चला गतिरोध
नागरासू क्षेत्र में गुरुद्वारे को लेकर उत्पन्न विवाद ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी थी. स्थिति संवेदनशील होने के कारण पुलिस लगातार मौके पर मौजूद रही. प्रशासन ने किसी भी प्रकार के टकराव से बचते हुए बातचीत और समन्वय का रास्ता अपनाया. इसी रणनीति के चलते बिना किसी बड़े व्यवधान के हालात को सामान्य बनाने में सफलता मिली.
पुलिस ने अपनाया संयम का रास्ता
डीजीपी दीपम सेठ ने कहा कि पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस ने अत्यंत धैर्य और संयम के साथ काम किया. विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के सहयोग से समाधान का रास्ता निकाला गया. उन्होंने बताया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य शांति बनाए रखना और सभी पक्षों के बीच संवाद कायम रखना था. इसी वजह से स्थिति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सका.
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आपत्तिजनक टिप्पणियों पर सख्ती
घटना के बाद सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर कुछ लोगों द्वारा अभद्र भाषा और आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने की जानकारी सामने आई. डीजीपी ने कहा कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है. संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि पहचान होने पर दोषियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए. पुलिस कानून के दायरे में रहकर आवश्यक कदम उठा रही है.
तीर्थयात्रियों से की गई विशेष अपील
उत्तराखंड में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. डीजीपी ने सभी यात्रियों से अपील की कि वे राज्य की स्थानीय संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और सामाजिक परंपराओं का सम्मान करें. उन्होंने कहा कि किसी भी ऐसी गतिविधि या टिप्पणी से बचना चाहिए जिससे स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत हों या सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो.