9 स्वरूप, 12 लीलाएं और दिव्य शक्ति! उत्तराखंड का नया आध्यात्मिक आकर्षण बना हनुमान धाम, CM ने की दर्शन की अपील

उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने नैनीताल जिले के रामनगर स्थित श्री हनुमान धाम की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता को रेखांकित किया. उन्होंने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से इस पावन मंदिर के दर्शन कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करने की अपील की.

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Meenu Singh

उत्तराखंड अपनी धार्मिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है. यहां स्थित प्राचीन मंदिर और आध्यात्मिक स्थल हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं. इसी क्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रामनगर स्थित श्री हनुमान धाम की महत्ता को लेकर संदेश साझा किया. उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम भी है.

आस्था का प्रमुख केंद्र है हनुमान धाम

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित श्री हनुमान धाम प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है. यहां का शांत वातावरण और दिव्य आभा श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करती है. यही कारण है कि यह मंदिर साल भर भक्तों की आस्था का केंद्र बना रहता है.


नौ दिव्य स्वरूपों के दर्शन का अवसर

श्री हनुमान धाम की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान हनुमान के नौ दिव्य स्वरूप हैं. इसके साथ ही श्रद्धालुओं को उनकी बारह पावन लीलाओं के दर्शन का भी अवसर मिलता है. यह अनूठी प्रस्तुति मंदिर को अन्य धार्मिक स्थलों से अलग पहचान दिलाती है.

श्रद्धालुओं से दर्शन की अपील

मुख्यमंत्री धामी ने नैनीताल आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपनी यात्रा के दौरान श्री हनुमान धाम के दर्शन अवश्य करें. उनका कहना है कि इस पवित्र स्थल की आध्यात्मिक ऊर्जा और शांत वातावरण हर आगंतुक को विशेष अनुभव प्रदान करता है.

धार्मिक पर्यटन को मिल रही नई पहचान

उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. चारधाम यात्रा के साथ प्रदेश के अन्य प्रमुख मंदिरों को भी पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाई जा रही है. श्री हनुमान धाम भी ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों में शामिल है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

आस्था और संस्कृति का अद्भुत संगम

श्री हनुमान धाम केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक भी है. मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि ऐसे पवित्र स्थलों का संरक्षण और प्रचार उत्तराखंड की धार्मिक पहचान को और मजबूत करेगा. साथ ही आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.