साल की शुरुआत में जब उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ आमतौर पर बर्फ की सफेद चादर में ढके रहते हैं, इस बार हालात बिल्कुल अलग नजर आ रहे हैं. बर्फबारी तो दूर, कई इलाकों में सामान्य बारिश तक नहीं हुई है. इसका असर सीधे तौर पर ॐ पर्वत, आदि कैलाश, पंचाचुली और कैलाश पर्वत पर दिखाई दे रहा है, जहां इस बार बर्फ लगभग न के बराबर है. ॐ पर्वत पर प्राकृतिक रूप से बनने वाला ‘ॐ’ का आकार भी बर्फ न होने के कारण साफ नजर नहीं आ रहा है.
समुद्रतल से 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी इस बार बेहद कम बर्फबारी हुई है. 29 दिसंबर 2025 और 10 जनवरी 2026 को ली गई तस्वीरों में साफ दिखता है कि आदि कैलाश और पंचाचुली क्षेत्र में बर्फ नहीं के बराबर है. हालांकि रास्तों में जमा पानी जम गया है, जिससे आवाजाही में दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन पहाड़ पूरी तरह सफेद नहीं हो पाए हैं.
बर्फ और बारिश की कमी का असर केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है. उत्तराखंड में कृषि और पर्यटन दोनों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है. जानकारों का कहना है कि अगर अगले एक-दो महीनों में बारिश और बर्फबारी नहीं हुई, तो फसलों की पैदावार में 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है.
कृषि निदेशक दिनेश कुमार के अनुसार, राज्य के कई जिलों में गेहूं, मटर, मसूर, सरसों और चना जैसी फसलों को नुकसान पहुंचा है. उत्तरकाशी, चमोली, देहरादून, टिहरी और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में 10 से 20 प्रतिशत तक फसल प्रभावित हुई है. कुछ क्षेत्रों में गेहूं की फसल को 25 प्रतिशत तक नुकसान होने की जानकारी भी सामने आई है.
कम बर्फबारी और बारिश के कारण आने वाले समय में जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ सकता है. साथ ही पानी की कमी और ग्लेशियरों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. 12 जनवरी तक उत्तराखंड के 13 जिलों में सामान्य बारिश नहीं हुई है, जबकि आमतौर पर इस समय तक अच्छी वर्षा दर्ज हो जाती है.
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 16 जनवरी तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है. हालांकि 17 और 18 जनवरी को उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में हल्की बारिश और 3400 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हल्की बर्फबारी की उम्मीद जताई गई है. हिमालय में बदले मौसम ने प्रकृति, खेती और जीवन तीनों के लिए चेतावनी दे दी है. अब सबकी निगाहें आने वाले दिनों की बारिश और बर्फबारी पर टिकी हैं.