धर्मनगरी हरिद्वार में निर्जला एकादशी के अवसर पर बुधवार सुबह से ही आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला. हरकी पैड़ी समेत प्रमुख गंगा घाटों पर हजारों श्रद्धालु पहुंचे और पवित्र गंगा में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया. घाटों पर भक्ति और श्रद्धा का माहौल पूरे दिन बना रहा. इस वर्ष अधिमास के कारण निर्जला एकादशी अपने सामान्य समय से लगभग एक माह बाद आई है. यही वजह रही कि इस विशेष तिथि को लेकर श्रद्धालुओं में अलग उत्साह दिखाई दिया. सुबह से ही गंगा तटों पर लंबी कतारें लगी रहीं और श्रद्धालु पुण्य लाभ के लिए स्नान करते नजर आए.
हरकी पैड़ी सहित अन्य प्रमुख घाटों पर सुबह से भक्तों का आगमन शुरू हो गया था. उत्तराखंड के अलावा देश के कई राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने मां गंगा में डुबकी लगाई. घाटों पर धार्मिक जयघोष और भजन-कीर्तन के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा. श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए विशेष प्रार्थनाएं भी कीं.
निर्जला एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद पूजा-अर्चना की. कई लोगों ने जरूरतमंदों को भोजन, जल और अन्य वस्तुओं का दान भी किया. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया दान और व्रत विशेष पुण्यदायी माना जाता है. इसी कारण घाटों और मंदिरों के आसपास धार्मिक गतिविधियां लगातार जारी रहीं.
आमतौर पर निर्जला एकादशी गंगा दशहरा के अगले दिन आती है, लेकिन इस बार अधिमास के चलते इसकी तिथि आगे खिसक गई. गंगा दशहरा जहां मई में मनाया गया था, वहीं निर्जला एकादशी 25 जून को पड़ रही है. इस बदलाव के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी और बड़ी संख्या में लोग हरिद्वार पहुंचे.
भीड़ को देखते हुए हरिद्वार पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा. मेले क्षेत्र और प्रमुख घाटों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया. सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम के जरिए पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.
धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी का व्रत और गंगा स्नान विशेष फलदायी माना जाता है. कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए व्रत, पूजा और दान से वर्षभर की एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त होता है. यही कारण है कि हर वर्ष इस पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचकर गंगा स्नान करते हैं.