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नैनीताल में 124वें नंदा देवी महोत्सव की तैयारियां तेज, 23 हजार घरों तक पहुंचेंगे कैलेंडर

नैनीताल में ऐतिहासिक 124वें श्री नंदा देवी महोत्सव 2026 की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं. इस बार 23 हजार कैलेंडर और मां नंदा के झंडे महिला दलों के जरिए घर-घर पहुंचाए जाएंगे.

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Shanu Sharma

सरोवर नगरी नैनीताल में हर साल होने वाला श्री नंदा देवी महोत्सव इस बार भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. महोत्सव को भव्य और व्यवस्थित रूप देने के लिए श्री राम सेवक सभा ने तैयारियां तेज कर दी हैं. इस वर्ष आयोजन की थीम 'संस्कार, संस्कृति, समृद्ध विरासत' तय की गई है.

आयोजकों ने इस बार महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया है. हाल ही में सभा भवन में मातृ शक्ति की बैठक आयोजित कर महोत्सव से जुड़ी जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई. महिला दलों के माध्यम से 23 हजार कैलेंडर और मां नंदा के झंडे लोगों के घरों तक पहुंचाए जाएंगे. इसके अलावा महोत्सव के दौरान शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.

16 सितंबर से शुरू होगा आयोजन

श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारी डॉ. ललित तिवारी के अनुसार, महोत्सव का शुभारंभ 16 सितंबर को सभा भवन में उद्घाटन कार्यक्रम के साथ होगा. इसी दिन भाद्रपद पंचमी के अवसर पर कदली वृक्ष लेने के लिए दल रवाना होगा. 17 सितंबर को कदली वृक्ष नैनीताल लाया जाएगा. सूखाताल में पूजन के बाद इसका तल्लीताल से नगर भ्रमण कराया जाएगा और शाम को पूजा-अर्चना होगी.


18 सितंबर को पारंपरिक कलाकार कदली वृक्ष, रुई, बांस और कपड़े जैसी सामग्री से मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियां तैयार करेंगे. इसी दिन बच्चों के लिए प्रश्नोत्तरी और लोकगीत प्रतियोगिता भी होगी. इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को कुमाऊं की लोक संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है. 19 सितंबर को सुबह करीब 5 बजे ब्रह्म मुहूर्त में मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी. इसके बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए कपाट खोले जाएंगे. मल्लीताल फ्लैट्स में मेले का आयोजन भी होगा.

डोला यात्रा के साथ होगा समापन

20 सितंबर को हवन, 21 सितंबर को महाभंडारा और 22 सितंबर को सुंदरकांड व भजन कार्यक्रम होंगे. 23 सितंबर को मां नंदा-सुनंदा की डोला यात्रा नगर भ्रमण करेगी. इसके बाद विधि-विधान से मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा और आठ दिवसीय महोत्सव का समापन होगा. आयोजकों के अनुसार नैनीताल में नंदा देवी महोत्सव की शुरुआत वर्ष 1903 से मानी जाती है. श्री राम सेवक सभा की स्थापना 1926 में हुई थी. मां नंदा-सुनंदा को राजराजेश्वरी के रूप में भी पूजा जाता है. यह महोत्सव लंबे समय से नैनीताल की धार्मिक आस्था और कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है.