तालों में ताल नैनीताल की झील में अधखाए मछलियों के शव, दुर्गंध और…एक ऐसी दुश्मन जिससे सबको है खतरा
उत्तराखंड के नैनीताल की नैनीझील में मछलियों की रहस्यमयी मौत से हड़कंप मच गया है. पानी में फैली दुर्गंध और तैरती मरी मछलियों से यह संकेत मिल रहे हैं कि झील का जैविक संतुलन बिगड़ रहा है. कुछ मछलियों के अधखाए शव से मंगुरा मछली पर हमला होने का शक है.
Nainital News: उत्तराखंड की प्रसिद्ध सरोवर नगरी नैनीताल की पहचान नैनीझील इन दिनों एक अजीब संकट का सामना कर रही है. झील में मछलियों की अचानक मौत और उनके अधखाए शवों के मिलने से हड़कंप मचा हुआ है. पानी में फैली दुर्गंध और लेयर पर तैरती मरी मछलियां इस बात का संकेत दे रही हैं कि झील का जैविक संतुलन बिगड़ रहा है.
चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मछलियों के शव अधखाए हुए पाए गए हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि शायद कोई मांसाहारी मछली इन्हें हमला कर रही है. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह हमला मंगुरा (कैटफिश) मछली की ओर से हो सकता है, जो मांसाहारी होती है और दूसरी मछलियों को खा सकती है. इस मंगुरा मछली को 27 जून को कैमरे में देखा गया था, लेकिन अब तक इसे झील से निकाला नहीं गया है.
2010 में क्या हुआ था?
अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती, तो यह मछलियों की मौत झील के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है. दरअसल, 2010 में भी ऐसा ही हुआ था जब मंगुरा मछली को झील में डाला गया था और झील विकास प्राधिकरण ने बाद में इन मछलियों को बाहर निकाला था. अगर यही स्थिति जारी रही, तो नैनीझील का जैविक संतुलन पूरी तरह से बिगड़ सकता है.
मछलियों के सड़ने से उठ रही बदबू
हालांकि, कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि झील में मौजूद सिल्वर कार्प और ग्रास कार्प मछलियों की उम्र पूरी हो चुकी है और वे प्राकृतिक कारणों से मर रही हैं. लेकिन मरी मछलियों की बढ़ती संख्या और उनके सड़ने से उठ रही बदबू ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को परेशानी में डाल दिया है.
नगर पालिका के अधिकारी रोहिताश शर्मा ने कहा कि सफाई कार्य लगातार किया जा रहा है, और जहां भी मरी मछलियां मिलती हैं, उन्हें निकाला जा रहा है. वहीं, जिला विकास प्राधिकरण के सचिव विजय नाथ शुक्ल ने बताया कि पंतनगर के मत्स्य विशेषज्ञों को इस बारे में सूचित किया गया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है.