मुहर्रम पर उत्तराखंड हाई अलर्ट, देहरादून में निकला 12 फीट का ताजिया; हल्द्वानी में ड्रोन से निगरानी
मोहर्रम के अवसर पर उत्तराखंड में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. देहरादून, हल्द्वानी और ऊधम सिंह नगर में जुलूसों की निगरानी ड्रोन से की जा रही है. प्रशासन शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष ध्यान दे रहा है.
देहरादून: मोहर्रम के मौके पर उत्तराखंड में प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है. राज्य के कई जिलों में ताजिया जुलूसों और धार्मिक आयोजनों को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. देहरादून से लेकर हल्द्वानी और ऊधम सिंह नगर तक पुलिस, पैरामिलिट्री बल और निगरानी टीमें सक्रिय हैं. प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हों और किसी भी प्रकार की अफवाह या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो.
राजधानी देहरादून में मोहर्रम का जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजर रहा है. ईसी रोड से शुरू हुआ जुलूस विभिन्न प्रमुख चौराहों से होते हुए आगे बढ़ रहा है. यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस ने विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया है. कई स्थानों पर सुरक्षा कर्मियों की अतिरिक्त तैनाती की गई है.
हल्द्वानी और बनभूलपुरा पर विशेष नजर
नैनीताल जिले के हल्द्वानी और संवेदनशील माने जाने वाले बनभूलपुरा क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं. ड्रोन कैमरों के माध्यम से जुलूस मार्गों और भीड़भाड़ वाले इलाकों की निगरानी की जा रही है. कंट्रोल रूम से लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके.
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सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की नजर
पुलिस विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर विशेष निगरानी शुरू की है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भड़काऊ पोस्ट, अफवाह या गलत सूचना फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन लगातार धार्मिक आयोजकों और ताजिया कमेटियों के संपर्क में है ताकि सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सकें.
हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन
ऊधम सिंह नगर में प्रशासन न्यायालय के निर्देशों के अनुसार व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर रहा है. ताजियों की ऊंचाई निर्धारित सीमा के भीतर रखने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से बचाने के निर्देश दिए गए हैं. संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और निगरानी को और मजबूत बनाया गया है.
मोहर्रम और करबला की विरासत
मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना माना जाता है. इसकी दसवीं तारीख आशूरा के रूप में जानी जाती है. यह दिन इमाम हुसैन और उनके साथियों की करबला में दी गई कुर्बानी की याद दिलाता है. उनकी शहादत को अन्याय के खिलाफ संघर्ष, सत्य और इंसाफ की मिसाल माना जाता है. इसी संदेश को याद करते हुए देशभर में मोहर्रम के धार्मिक आयोजन किए जाते हैं.