उत्तराखंड में चुनावी मोड में आई कांग्रेस, 10 जिलों को 4 जोन में बांटकर बनाई खास रणनीति
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारी के तहत कांग्रेस ने 10 पर्वतीय जिलों को चार जोन में बांटकर जनसंपर्क अभियान शुरू करने का फैसला किया है. पार्टी 28 जून से जनता के बीच विभिन्न मुद्दे उठाएगी.
देहरादून: उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने संगठनात्मक गतिविधियों को तेज कर दिया है. पार्टी ने पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक व्यापक जनसंपर्क और जनजागरण अभियान की घोषणा की है. इसके तहत राज्य के 10 पर्वतीय जिलों को चार अलग-अलग जोन में विभाजित किया गया है और वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह अभियान 28 जून से शुरू होकर 12 जुलाई तक चलेगा और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर विशेष जोर रहेगा.
कांग्रेस नेतृत्व ने चुनावी तैयारियों को गति देने के लिए वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग क्षेत्रों की कमान सौंपी है. पिथौरागढ़, चंपावत और बागेश्वर की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को दी गई है. वहीं रुद्रप्रयाग, चमोली और पौड़ी क्षेत्र का नेतृत्व डॉ. हरक सिंह रावत करेंगे. उत्तरकाशी और टिहरी की जिम्मेदारी प्रीतम सिंह तथा नैनीताल और अल्मोड़ा का दायित्व करन माहरा को सौंपा गया है.
जनता से सीधे संवाद की तैयारी
अभियान के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य भी विभिन्न जिलों का दौरा करेंगे. पार्टी का उद्देश्य कार्यकर्ताओं और आम लोगों से सीधा संवाद स्थापित करना है. कांग्रेस का मानना है कि जमीनी स्तर पर संवाद बढ़ाकर संगठन को और मजबूत किया जा सकता है.
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दो चरणों में चलेगा अभियान
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अनुसार अभियान को दो चरणों में संचालित किया जाएगा. पहले चरण में पर्वतीय जिलों पर फोकस रहेगा. इसके बाद दूसरे चरण में देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी क्षेत्रों में जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
इन मुद्दों को बनाएगी चुनावी हथियार
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि अभियान के दौरान बेरोजगारी, महंगाई, कानून व्यवस्था और भूमि, शराब तथा खनन माफिया जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा. पार्टी इन विषयों को जनता के बीच ले जाकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है.
सरकार पर साधा निशाना
गणेश गोदियाल ने हरिद्वार भूमि प्रकरण को लेकर सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में केवल छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है, जबकि वास्तविक जिम्मेदार लोगों तक जांच नहीं पहुंची. साथ ही उन्होंने जल्द नई प्रदेश कार्यकारिणी के गठन के संकेत भी दिए.