केदारनाथ के कपाट बंद, उखीमठ के लिए बाबा की डोली 55 किलोमीटर की तय करेगी पैदल यात्रा, 17 लाख श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे

Kedarnath: उत्तराखंड के केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए. बाबा की डोली 55 किलोमीटर की यात्रा कर उखीमठ पहुंचेंगी. इस साल 17 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं. शीतकालीन पूजा व्यवस्था उखीमठ में जारी रहेगी.

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Reepu Kumari

Kedarnath: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं. सोमवार को मंदिर के मुख्य द्वार पर ताला लगाते ही श्रद्धालुओं में भावुकता का माहौल बन गया. बाबा केदार की डोली इस बार 55 किलोमीटर की यात्रा कर उखीमठ पहुंचेंगी, जहां अगले छह महीनों तक वे शीतकालीन गद्दी ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होंगे. इस पवित्र अवसर का साक्षी बनने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मंदिर पहुंचे. आर्मी बैंड द्वारा पारंपरिक धुन बजाई गई, जिसने इस शुभ क्षण की गरिमा और बढ़ा दी.

इस साल 2 मई को केदारनाथ के कपाट खुले थे.करीब 17 लाख 45 हजार श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन कर चुके हैं. यह 2013 की आपदा के बाद सबसे बड़ी संख्या में भक्तों की यात्रा है. श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर आध्यात्मिक अनुभव का प्रतीक रहा और बाबा की शीतकालीन यात्रा का महत्व और भी बढ़ गया.

शीतकालीन पूजा व्यवस्था

केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने के साथ ही शीतकालीन पूजा का दौर शुरू हो गया है. अब मुखवा स्थित शीतकालीन गद्दीस्थल पर पूजा का संचालन किया जाएगा. यमुनोत्री के देवता की पूजा खरसाली में होगी, जबकि केदारनाथ के दर्शन उखीमठ में संभव होंगे.

बाबा की डोली की यात्रा

बाबा की डोली 25 अक्टूबर को केदारनाथ से उखीमठ की 55 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय करेगी. यह यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का प्रतीक भी मानी जाती है.

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा

शीतकालीन दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस और मंदिर समितियों ने विशेष व्यवस्था की है. इसके तहत काउंटर, आवास और परिवहन व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की गई हैं ताकि भक्त आरामदायक और सुरक्षित यात्रा कर सकें.

आस्था और भक्ति का प्रतीक

केदारनाथ धाम में इस साल इतनी बड़ी संख्या में भक्तों की उपस्थिति 2013 की आपदा के बाद का दूसरा सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. यह दर्शाता है कि कठिन मौसम और यात्रा की मुश्किलों के बावजूद लोगों की आस्था और भक्ति लगातार मजबूत बनी हुई है.