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देश के लिए कई मेडल जीतने वाले जसपाल राणा राजनीति में क्यों नहीं बना पाए पहचान?

भारत के दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा ने खेल जगत में कई उपलब्धियां हासिल कीं, लेकिन राजनीति में उनका सफर सफल नहीं रहा. भाजपा से चुनाव लड़ने से लेकर कांग्रेस में शामिल होने तक उनका राजनीतिक करियर कई उतार चढ़ाव से गुजरा.

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Edited By: Babli Rautela
देश के लिए कई मेडल जीतने वाले जसपाल राणा राजनीति में क्यों नहीं बना पाए पहचान?
Courtesy: Social Media

भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में जसपाल राणा का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है. अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने देश को कई यादगार उपलब्धियां दिलाईं. खेल जगत में उनकी पहचान एक ऐसे खिलाड़ी की रही, जिसने अपने निशाने से दुनिया भर में भारत का नाम रोशन किया. लेकिन जब उन्होंने राजनीति की दुनिया में कदम रखा, तो सफलता उनकी पहुंच से दूर रह गई. खेल के मैदान में जहां जसपाल राणा ने कई बार जीत का परचम लहराया, वहीं राजनीतिक मैदान में उनका सफर उम्मीदों के मुताबिक नहीं चल पाया.

भाजपा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

जसपाल राणा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी से की थी. वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन पर भरोसा जताते हुए उत्तराखंड की टिहरी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया. यह चुनाव उनके राजनीतिक करियर की पहली बड़ी परीक्षा थी. उनके सामने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रहे विजय बहुगुणा थे. चुनावी मुकाबला बेहद चर्चित रहा, लेकिन परिणाम जसपाल राणा के पक्ष में नहीं गया. उन्हें हार का सामना करना पड़ा और राजनीति में उनकी शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं हो सकी.

हार के बाद बदला राजनीतिक रास्ता

लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद जसपाल राणा का भाजपा से मोहभंग होने लगा. कुछ वर्षों बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया. राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर काफी चर्चा हुई, क्योंकि वह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके थे. हालांकि कांग्रेस में शामिल होने के बाद भी उनका राजनीतिक करियर गति नहीं पकड़ सका. उन्होंने न तो कोई बड़ा चुनाव लड़ा और न ही संगठन में कोई महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. धीरे धीरे उनकी सक्रियता कम होती गई.

वर्ष 2017 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने जसपाल राणा को अपने स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया था. लेकिन उन्होंने प्रचार अभियान में हिस्सा लेने से साफ इनकार कर दिया. इस फैसले ने साफ संकेत दे दिया कि राजनीति के प्रति उनकी रुचि लगातार कम हो रही है. इसके बाद उन्होंने लगभग पूरी तरह राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बना ली.

राजनीति से दूर, खेल से जुड़ाव बरकरार

राजनीतिक जीवन में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद जसपाल राणा ने खुद को फिर से खेल और निशानेबाजी से जोड़ लिया. वह युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने और खेल के विकास में योगदान देने पर अधिक ध्यान देने लगे. खेल जगत में उनकी उपलब्धियां आज भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं. यही वजह है कि उनकी पहचान एक सफल खिलाड़ी और कोच के रूप में अधिक मजबूत बनी रही.

जसपाल राणा का राजनीतिक सफर अक्सर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि हर क्षेत्र में सफलता का रास्ता अलग होता है. खेल में असाधारण उपलब्धियां हासिल करने वाला खिलाड़ी राजनीति की जटिलताओं में खुद को स्थापित नहीं कर पाया. आज भी उन्हें एक ऐसे महान निशानेबाज के रूप में याद किया जाता है, जिसने खेल के मैदान में कई लक्ष्य साधे, लेकिन राजनीति के मैदान में सफलता का निशाना नहीं लगा सका. उनकी कहानी यह भी बताती है कि लोकप्रियता और प्रतिभा के बावजूद राजनीति में सफलता के लिए अलग तरह की रणनीति, अनुभव और जनसंपर्क की जरूरत होती है.