उत्तराखंड के गांवों की मेहनत को मिलेगा बड़ा बाजार, हाउस ऑफ हिमालयाज में दोगुने होंगे उत्पाद

उत्तराखंड सरकार हाउस ऑफ हिमालयाज में शामिल स्थानीय उत्पादों की संख्या 75 से बढ़ाकर करीब दोगुनी करने की तैयारी कर रही है. ग्राम्य विकास विभाग ने सभी जिलों से विशिष्ट उत्पादों का ब्योरा मांगा है.

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Km Jaya

देहरादून: उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को देश और दुनिया के बाजार तक पहुंचाने के लिए शुरू किए गए अंब्रेला ब्रांड हाउस ऑफ हिमालयाज का दायरा अब और बढ़ने जा रहा है. वर्तमान में इस ब्रांड के तहत उत्तराखंड के 75 स्थानीय उत्पाद शामिल हैं. सरकार अब इनकी संख्या दोगुनी करने की तैयारी कर रही है. 

इसके लिए ग्राम्य विकास विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों से प्रमुख और विशिष्ट स्थानीय उत्पादों का ब्योरा मांगा है. विभाग ने जिलों को ऐसे उत्पादों की जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिनके स्थानीय स्तर पर उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं हैं और जिनकी बाजार में मांग पैदा की जा सकती है. 

क्या होगा प्रॉसेस?

जिलों से प्राप्त प्रस्तावों का निदेशालय और शासन स्तर पर परीक्षण किया जाएगा. इसके बाद गुणवत्ता, स्थानीय विशेषता, उत्पादन क्षमता और बाजार की संभावनाओं जैसे मानकों के आधार पर नए उत्पादों का चयन किया जाएगा.


हाउस ऑफ हिमालयाज उत्तराखंड के पारंपरिक और स्थानीय उत्पादों को एक मजबूत ब्रांड पहचान देने की दिशा में काम कर रहा है. इस ब्रांड के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाले उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. 

जनवरी 2025 से अब तक कितनी हुई बिक्री?

जनवरी 2025 से अब तक हाउस ऑफ हिमालयाज के माध्यम से छह करोड़ रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री हो चुकी है. यह स्थानीय उत्पादों के लिए बढ़ती बाजार संभावनाओं का संकेत माना जा रहा है.

क्या है सरकार का उद्देश्य?

सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादों की बिक्री बढ़ाना नहीं है. इसके जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है. स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग को मजबूत करके स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण उद्यमियों और स्थानीय उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की योजना है.

उत्पादों की संख्या बढ़ने से प्रदेश के अधिक जिलों और अधिक ग्रामीण उत्पादकों को इस ब्रांड से जुड़ने का अवसर मिलेगा. विभाग प्रत्येक जिले की खास पहचान को सामने लाने पर भी जोर दे रहा है. पर्वतीय क्षेत्रों में तैयार होने वाले कृषि और बागवानी उत्पादों के अलावा हस्तशिल्प और अन्य पारंपरिक उत्पादों को भी बाजार की जरूरत के अनुसार विकसित करके हाउस ऑफ हिमालयाज से जोड़ा जा सकता है.

इससे स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले उत्पादों को व्यापक बाजार मिलेगा और उत्पादकों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है. साथ ही उत्तराखंड की पारंपरिक कला, कृषि और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है.

हाउस ऑफ हिमालयाज कंपनी की प्रबंध निदेशक ने क्या बताया?

अपर सचिव ग्राम्य विकास एवं हाउस ऑफ हिमालयाज कंपनी की प्रबंध निदेशक झरना कमठान के अनुसार जिलों से प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद उनका परीक्षण किया जाएगा. चयनित उत्पादों को चरणबद्ध तरीके से हाउस ऑफ हिमालयाज में शामिल किया जाएगा. सरकार की इस पहल से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बड़ा बाजार मिलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद है.