हिमालयी हिरण का शिकार कर पकाने की तैयारी, रुद्रप्रयाग में 14 आरोपी हुए गिरफ्तार, वन विभाग की बड़ी कार्यवाही
उत्तराखंड के पहाड़ी जिले रुद्रप्रयाग में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है. जहां पर संरक्षित प्रजाति के एक हिमालयी हिरण के कथित शिकार के आरोप में 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है.
रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड के पहाड़ी जिले रुद्रप्रयाग में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है. जहां पर संरक्षित प्रजाति के एक हिमालयी हिरण के कथित शिकार के आरोप में 14 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है. अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यवाही उस समय की गई जब आरोपी हिरण का मांस पकाने की तैयारी कर रहे थे.
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह घटना 6 मार्च को सामने आई. रुद्रप्रयाग वन प्रभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग इलाके में अवैध शिकार में शामिल हैं. सूचना के आधार पर टीम ने तुरंत कार्यवाही की और संदिग्धों को पकड़ लिया. बताया गया कि हिरण का शिकार एक दिन पहले किया गया था.
गुप्त सूचना के बाद छापेमारी
उप प्रभागीय वनाधिकारी देवेन्द्र सिंह पुंडीर ने बताया कि, वन विभाग की टीम ने खंखरा रेंज में एक विशेष अभियान चलाया. जिसमें एक अधिकारी के नेतृत्व में दल ने कोंडली-क्वाली गांव के पास छापा मारा, जहां से 14 लोगों को हिरण के अवैध शिकार के आरोप में हिरासत में लिया गया.
कार्यवाही के दौरान टीम को ऐसे संकेत भी मिले कि आरोपी हिरण का मांस पकाने की तैयारी कर रहे थे. पुंडीर ने आरोपियों के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि आरोपी डुडाटोली वन क्षेत्र से सटे कोंडली-क्वाली गांव के रहने वाले हैं.
संरक्षित वन्यजीव प्रजाति है हिमालयन बार्किंग डियर
वन विभाग के मुताबिक जिस हिरण का शिकार किया गया है, वह कोई आम हिरण नहीं बल्कि हिमालयी बार्किंग हिरण यानी हिमालयी भौंकने वाला हिरण है. यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित मानी जाती है. इस प्रजाति को पहाड़ी इलाकों में उसकी तेज आवाज के कारण 'बार्किंग डियर' भी कहा जाता है.
ऊंचाई वाले जंगलों में मिलता है यह हिरण
यह हिरण आमतौर पर उत्तराखंड के घने जंगलों में 3,000 से 8,000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं. पिछले कुछ सालों में वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे संरक्षण अभियानों के कारण इस प्रजाति की संख्या में धीरे-धीरे सुधार देखा गया है और कई इलाकों में इसकी मौजूदगी भी दर्ज की गई है.
वन्यजीव संरक्षण के लिए सख्त कार्यवाही
वन विभाग का कहना है कि संरक्षित वन्यजीवों के शिकार के मामलों को गंभीरता से लिया जाता है. ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाती है ताकि अवैध शिकार पर रोक लगाई जा सके और जंगलों में रहने वाले दुर्लभ जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. फिलहाल गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है.
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