मोदी युग में बदली देवभूमि की तस्वीर, केदारनाथ से आदि कैलाश तक लिखी गई विकास की नई गाथा

पिछले 12 वर्षों में उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में बड़े स्तर पर विकास कार्य हुए हैं. केदारनाथ, बदरीनाथ, आदि कैलाश और चारधाम परियोजनाओं ने राज्य को वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन के केंद्र के रूप में स्थापित किया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

देहरादून: उत्तराखंड के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए बीते वर्षों में कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर काम किया गया है. केंद्र सरकार की पहल पर केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में व्यापक पुनर्विकास हुआ, जबकि चारधाम यात्रा मार्ग को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया. रोपवे परियोजनाओं, सड़क संपर्क और मंदिर विकास योजनाओं ने श्रद्धालुओं की यात्रा को अधिक सुगम बनाया है. इन प्रयासों का असर केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी दिखाई दिया है.

साल 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी गई. धाम में यात्री सुविधाओं, पैदल मार्गों और सार्वजनिक ढांचे को मजबूत किया गया. पुनर्विकास कार्यों के बाद केदारपुरी का स्वरूप पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और आधुनिक दिखाई देता है. श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ सुरक्षा और आवागमन की व्यवस्था भी मजबूत की गई है.

बदरीनाथ धाम में जारी विकास कार्य

बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत विभिन्न परियोजनाओं पर काम चल रहा है. करीब 255 करोड़ रुपये की लागत से धाम को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. सरकार का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराना है.


रोपवे परियोजनाओं से मिलेगी राहत

केंद्र सरकार ने सोनप्रयाग-केदारनाथ और गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा. बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग श्रद्धालु विशेष रूप से इसका लाभ उठा सकेंगे. पर्वतीय क्षेत्रों में सुगम आवागमन के लिए इन्हें महत्वपूर्ण परियोजनाओं के रूप में देखा जा रहा है.

आदि कैलाश और मानसखंड को नई पहचान

पिथौरागढ़ स्थित आदि कैलाश क्षेत्र को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है. इसके साथ ही कुमाऊं क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरों को विकसित करने के लिए मानसखंड मंदिर माला मिशन चलाया जा रहा है. इस योजना के तहत धार्मिक स्थलों को बेहतर सड़क, पर्यटन सुविधाओं और आधारभूत ढांचे से जोड़ा जा रहा है.

चारधाम सड़क परियोजना से बढ़ा पर्यटन

चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना ने उत्तराखंड की धार्मिक यात्रा को नई गति प्रदान की है. बेहतर सड़क संपर्क से यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनी है. इसके परिणामस्वरूप पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि हुई है और स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिला है. राज्य के कई अन्य धार्मिक स्थलों पर भी विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे उत्तराखंड की आध्यात्मिक पहचान और मजबूत हुई है.