'लकड़ी की पाटी से मुख्यमंत्री तक का सफर', पुष्कर सिंह धामी ने साझा किया पांच साल की सरकार का लेखा-जोखा
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बचपन के संघर्ष, सैनिक परिवार से मिले संस्कार और मुख्यमंत्री बनने तक की यात्रा को साझा किया है. उन्होंने कहा कि संसाधनों के अभाव के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी. साथ ही सरकार के पांच वर्षों की उपलब्धियों और सुशासन के मॉडल को भी सामने रखा.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए बताया कि उनका जीवन बेहद साधारण परिस्थितियों में शुरू हुआ. उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के एक दूरदराज गांव में उनका बचपन बीता, जहां आज की तरह आधुनिक शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं. स्कूलों में स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर, मोबाइल या प्रोजेक्टर जैसी सुविधाएं तो दूर, कई बार कॉपी-किताबें तक आसानी से नहीं मिलती थीं.
धामी ने बताया कि उनकी शुरुआती पढ़ाई लकड़ी की पाटी, खड़िया और टाट के बोरे के सहारे हुई. उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत कहानी नहीं, बल्कि उस दौर में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पले-बढ़े पूरे एक पीढ़ी का साझा अनुभव है. सीमित संसाधनों के बावजूद लोगों ने अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल पहचान को हमेशा जीवित रखा.
सैनिक पिता से मिले अनुशासन और राष्ट्रसेवा के संस्कार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिता के सैनिक जीवन ने उन्हें अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाया. बचपन से ही उन्होंने सीखा कि कठिन परिस्थितियों और अभावों को निरंतर मेहनत, अनुशासित जीवनशैली और सकारात्मक सोच के बल पर हराया जा सकता है. उन्होंने कहा कि कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि एक सामान्य परिवार से निकलकर उन्हें उत्तराखंड का नेतृत्व करने का अवसर मिलेगा. धामी के अनुसार, 4 जुलाई 2021 उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और अप्रत्याशित दिन था, जब पार्टी नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें उत्तराखंड की जिम्मेदारी सौंपी.
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पांच वर्षों में सुशासन और विकास
मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल के पांच वर्ष पूरे होने पर प्रदेश की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में राज्य ने राजनीतिक अस्थिरता और नीतिगत जड़ता से बाहर निकलकर विकास की नई दिशा में कदम बढ़ाया है. धामी के अनुसार उनकी सरकार ने पर्यटन, पोषण, पर्यावरण, प्रशासन और प्रगति जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी. उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए, जबकि युवाओं का व्यवस्था पर विश्वास मजबूत करने का प्रयास भी किया गया.
विकल्प रहित संकल्प के साथ लिए निर्णायक फैसले
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी. उन्होंने दावा किया कि पहले जहां जनहित से जुड़ी फाइलें लंबे समय तक लंबित रहती थीं, वहीं अब निर्णय प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाया गया है. उन्होंने कहा कि महान राजनीतिज्ञ आचार्य कौटिल्य के विचारों से प्रेरणा लेते हुए उनकी सरकार ने संकट के समय भी साहसिक और जनहितकारी फैसले लिए. मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनता का सहयोग और भरोसा राज्य के विकास की सबसे बड़ी ताकत है.