होम-स्टे योजना में 2 लाख रुपये रिश्वत मांगने का आरोप, देहरादून के जिला पर्यटन विकास अधिकारी सस्पेंड

उत्तराखंड की दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना में कथित रिश्वतखोरी के आरोपों के बाद देहरादून के जिला पर्यटन विकास अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है.  मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. 

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Sagar Bhardwaj

उत्तराखंड सरकार की महत्वाकांक्षी दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना में कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद पर्यटन विभाग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है. देहरादून के जिला पर्यटन विकास अधिकारी बृजेन्द्र पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. उन पर होम-स्टे पंजीकरण और अनुदान से जुड़े मामलों में रिश्वत मांगने का आरोप है. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के बाद विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है. 

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद बढ़ी कार्रवाई

मामला उस समय चर्चा में आया जब ऋषिकेश निवासी मोहम्मद रईस ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि उनके 'किंग क्वीन' होम-स्टे के पंजीकरण के लिए जिला पर्यटन विकास अधिकारी बृजेन्द्र पाण्डेय और विभाग के एक कर्मचारी ने दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी. शिकायतकर्ता का कहना है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उनका आवेदन जानबूझकर लंबित रखा गया. आरोप है कि बाद में कथित तौर पर कैलकुलेटर पर राशि दिखाकर रिश्वत की मांग की गई. शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उन्होंने अलग-अलग किश्तों में 1.90 लाख रुपये दिए. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है. 

वायरल वीडियो और प्रारंभिक जांच के बाद निलंबन

पर्यटन विभाग के अनुसार सोशल मीडिया पर वायरल शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामला प्रथम दृष्टया गंभीर प्रतीत हुआ. इसके बाद उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बृजेन्द्र पाण्डेय के निलंबन का आदेश जारी किया. विभाग ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई जांच पूरी होने तक की गई है और अधिकारी के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक प्रक्रिया भी प्रस्तावित है. अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे. 


वरिष्ठ अधिकारी करेंगे जांच, साक्ष्यों की होगी पड़ताल

मामले की जांच के लिए परिषद के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र सिंह भंडारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. उन्हें शिकायत, वायरल वीडियो, उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की विस्तार से जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं. निलंबन अवधि के दौरान बृजेन्द्र पाण्डेय परिषद मुख्यालय, देहरादून से संबद्ध रहेंगे और बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे. नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, लेकिन इसके लिए उन्हें यह प्रमाणित करना होगा कि वे किसी अन्य रोजगार या आय के स्रोत से जुड़े नहीं हैं. 

स्वरोजगार योजना की पारदर्शिता पर उठे सवाल

राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. पार्टी का कहना है कि यदि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने वाले लोगों से ही रिश्वत मांगी जाएगी तो स्वरोजगार को बढ़ावा देने का उद्देश्य प्रभावित होगा. उल्लेखनीय है कि दीनदयाल उपाध्याय होम-स्टे योजना का उद्देश्य ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना तथा स्थानीय लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है. ऐसे में इस योजना से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों ने इसकी पारदर्शिता और प्रभावशीलता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब पूरे मामले में आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी.