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कांवड़ मेले में पहली बार साइबर कमांडो तैनात, फर्जी वीडियो पर तुरंत होगा एक्शन

साइबर कमांडो की तैनाती इस बार की बड़ी खासियत है. एसएसपी ने कहा कि सोशल मीडिया पर कोई भी भ्रामक वीडियो वायरल होने पर 36 घंटे के अंदर कार्रवाई की जाएगी. वहीं AI जनरेटेड फर्जी वीडियो पर सिर्फ 3 घंटे में हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.

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उत्तराखंड: 30 जुलाई से शुरू हो रही कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तराखंड पुलिस और प्रशासन ने खास तैयारी की है. इस बार पहली बार कांवड़ मेले में साइबर कमांडो की तैनाती की गई है. ये कमांडो सोशल मीडिया पर 24 घंटे नजर रखेंगे और फर्जी, भ्रामक या AI से बने वीडियो पर तुरंत कार्रवाई करेंगे.

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित और एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने सोमवार को प्रेस क्लब में मीडिया को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से पूरा करने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सेक्टरवार अधिकारियों को तैनात किया गया है.

साइबर सुरक्षा पर खास फोकस

साइबर कमांडो की तैनाती इस बार की बड़ी खासियत है. एसएसपी ने कहा कि सोशल मीडिया पर कोई भी भ्रामक वीडियो वायरल होने पर 36 घंटे के अंदर कार्रवाई की जाएगी. वहीं AI जनरेटेड फर्जी वीडियो पर सिर्फ 3 घंटे में हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. कांवड़ मेला खत्म होने के बाद इन साइबर कमांडो को कुंभ मेला में भी तैनात किया जाएगा.


एक्सप्रेसवे पर नई व्यवस्था

यात्रा के दौरान ट्रैफिक सुचारू रखने के लिए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को कांवड़ियों के लिए बंद रखा जाएगा. श्रद्धालु मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करेंगे. प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि इससे यात्रा सुगम रहेगी.

स्टील कलश ने बदली यात्रा की चाल

कांवड़ यात्रा का रूप इस बार काफी बदल गया है. पहले श्रद्धालु 10 से 13 दिनों में यात्रा पूरी कर लेते थे, लेकिन अब स्टील के बड़े-बड़े कलशों के चलन से यात्रा का समय बढ़कर 15 से 18 दिन हो गया है. भारी कलश होने से कांवड़िए धीरे-धीरे चलते हैं और बीच में ज्यादा आराम करते हैं.

इसी वजह से इस बार बड़ी संख्या में शिवभक्त सावन शुरू होने से पहले ही हरिद्वार पहुंच गए हैं. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान से आए कांवड़िए गंगाजल भरकर अपने गांव लौट रहे हैं.

100 से 200 लीटर गंगाजल ले जा रहे श्रद्धालु

अब कई श्रद्धालु स्टील के आकर्षक और बड़े कलशों में 100 से 200 लीटर तक गंगाजल भरकर ले जा रहे हैं. जबकि सामान्य कलश में 5 से 50 लीटर पानी भरा जा रहा है. रोहतक के सोनू शर्मा ने बताया कि पहले उनकी यात्रा 8-10 दिन में पूरी हो जाती थी, लेकिन अब भारी कलश के कारण 15-16 दिन लग जाते हैं. इसलिए वे पहले पहुंच गए.

स्वास्थ्य सुविधाएं भी तैयार

कांवड़ मेला में स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है. विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों में 260 कर्मचारी ड्यूटी पर रहेंगे ताकि किसी भी श्रद्धालु को स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर तुरंत मदद मिल सके.