बंद कमरे में नहीं बनेगा कांग्रेस का घोषणापत्र! Gen-Z से पूर्व सैनिकों तक, जनता तय करेगी उत्तराखंड का चुनावी एजेंडा
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने जनता से सुझाव लेकर घोषणा पत्र तैयार करने की योजना बनाई है. पार्टी युवा, महिलाएं, पूर्व सैनिक और कर्मचारियों समेत विभिन्न वर्गों से संवाद करेगी.
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र की प्रक्रिया शुरू कर दी है. पार्टी का कहना है कि इस बार घोषणापत्र कुछ नेताओं की बंद कमरे की चर्चा से नहीं, बल्कि जनता के बीच जाकर तैयार होगा. इसके लिए प्रदेशभर में अलग-अलग सामाजिक वर्गों से बातचीत कर उनकी समस्याएं और प्राथमिकताएं समझी जाएंगी.
हर वर्ग से मांगे जाएंगे सुझाव
कांग्रेस की मेनिफेस्टो कमेटी के अध्यक्ष और विधायक भुवन कापड़ी के मुताबिक, कमेटी पहले जिलों में जाकर लोगों से संवाद करेगी. युवाओं, महिलाओं, एससी-एसटी समुदाय, शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों, उपनल कर्मियों, पूर्व सैनिकों, पर्यावरण से जुड़े लोगों और स्वयं सहायता समूहों से उनकी समस्याएं पूछी जाएंगी. आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ भोजन माता और सहायिकाओं को भी इस अभियान से जोड़ने की तैयारी है. पार्टी इन बातचीत से मिले मुद्दों को व्यवस्थित तरीके से संकलित करेगी.
Gen-Z और नई पीढ़ी पर भी फोकस
कांग्रेस इस बार युवा पीढ़ी की सोच को भी अपने चुनावी एजेंडे में जगह देना चाहती है. कमेटी Gen-Z और Gen-Alpha के युवाओं से बातचीत कर यह जानने की कोशिश करेगी कि वे उत्तराखंड के भविष्य को किस रूप में देखते हैं. पार्टी का कहना है कि केवल समस्याएं सुनना ही उद्देश्य नहीं होगा, बल्कि युवाओं से समाधान और नीतियों को लेकर सुझाव भी लिए जाएंगे. इसके बाद उपयोगी सुझावों को घोषणा पत्र में शामिल करने पर विचार किया जाएगा.
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विधानसभा स्तर तक पहुंचेगा अभियान
जिला स्तर पर बातचीत के बाद कांग्रेस का यह अभियान विधानसभा क्षेत्रों तक ले जाने की योजना है. हर क्षेत्र में स्थानीय समस्याओं और जरूरतों को समझने की कोशिश की जाएगी, ताकि घोषणापत्र में पूरे प्रदेश के साथ-साथ अलग-अलग इलाकों के मुद्दों को भी स्थान मिल सके. आम लोगों को सीधे सुझाव भेजने का विकल्प भी दिया जाएगा. इसके लिए पार्टी Gmail और WhatsApp के माध्यम से सुझाव लेने की व्यवस्था करेगी.
गैरसैंण पर अभी फैसला नहीं
कांग्रेस की कोशिश चुनाव की घोषणा के साथ ही अपना घोषणापत्र जारी करने की है. भुवन कापड़ी ने स्थायी राजधानी के सवाल पर कहा कि गैरसैंण को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. इस मुद्दे पर वरिष्ठ नेताओं, प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, विधानमंडल दल और विभिन्न संगठनात्मक समितियों से चर्चा की जाएगी. मौजूदा और पूर्व विधायकों तथा पूर्व सांसदों की राय भी ली जाएगी. इसके बाद सामूहिक रूप से पार्टी का रुख तय होगा.